Sunday, November 8, 2026
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Homeउत्तराखण्डपांच हजार आबादी करे पुकार, पानी निकासी की सुविधा दो सरकार

पांच हजार आबादी करे पुकार, पानी निकासी की सुविधा दो सरकार

काशीपुर। लगभग दो दशक पहले मंगल बाजार कॉलोनी का विकास कराया गया। तभी से कॉलोनी में पानी निकासी की व्यवस्था नहीं है। शुरूआत में लोगों ने घरों का पानी सड़क किनारे नाला बनाकर निकालना शुरू किया और वही परंपरा अभी तक जारी है। आज भी यहां घरों का पानी सड़क किनारे बहते हुए देखा जा सकता है। छोटे-छोटे नालों से होते हुए घरों का पानी खाली पड़े प्लाटों में भर जाता है। काॅलोनी में चार से ज्यादा प्लाट में साल के लगभग दस महीने पानी भरा रहता है। इससे कई संक्रामक रोगों का खतरा रहता है। नगर निगम का हिस्सा होने के बाद भी यहां सुविधाएं नदारद हैं। सालों से इस समस्या से जूझ रहे क्षेत्र की पांच हजार की आबादी सरकार से मदद की गुहार लगा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पानी निकासी के लिए कभी यहां नाला हुआ करता था, लेकिन बाद में उस पर भी घर बन गए। अब पानी निकासी का नाला सिर्फ कागजों में रह गया है। कॉलोनी में पेयजल की समस्या भी है। सड़कें भी बदहाल हैं। अगर सच में यहां नाला था और अब पाट कर घर बना लिए गए हैं तो दस्तावेजों की जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी। नाले को अस्तित्व को लाया जाएगा। – अभय प्रताप सिंह, एसडीएम।
मंगल बाजार कॉलोनी की समस्या बहुत पुरानी है। पार्षद होने के नाते मैं कई बार अधिकारियों से मांग कर चुका हूं कि पानी निकासी की व्यवस्था की जाए। इसके बाद भी पानी निकासी की उचित व्यवस्था नहीं हो सकी है। इससे पांच हजार की आबादी परेशान है। मेरे स्तर से पानी निकासी की व्यवस्था कराने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। – ऐलम सिंह, पार्षद
हम कॉलोनी के लोग लंबे समय से प्लाटों में पानी भरने से परेशान हैं। सबसे ज्यादा परेशानी बरसात के दिनों में होती है जब पूरी कॉलोनी में पानी भर जाता है। – शकुंतला
बारिश के कारण कॉलोनी का हाल तालाब जैसा हो जाता है। लंबे समय तक पानी जमा रहने से बीमारियों का भी खतरा बना रहता है। हमारी सुध लेनी चाहिए। – मीरा
पानी निकासी की सुविधा न होना कालोनी वालों के लिए बड़ी समस्या है। निकासी को लेकर आपस में विवाद हो जाता है। पानी निकासी सुविधा दी जानी चाहिए। – वीरेंद्र साहू
हम लोग लंबे समय से पानी निकासी की व्यवस्था की मांग कर रहे हैं लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ है। हमारी सुनवाई क्यों नहीं होती आज तक समझ नहीं आया। – महेश चंद्र

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