फतेहपुर रेंज के जंगल में सौ मीटर के दायरे में तीन बाघ दिखे हैं। बाघों के व्यवहार के विपरित इनके आसपास दिखने से वन अधिकारी भी हैरान हैं। इनमें से कौन सा बाघ आदमखोर है उसे पहचानना वन विभाग के लिए मुश्किल हो रहा है। अब भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्लूआईआई) की टीम आदमखोर बाघ के चिन्हित करने में जुट गई है।
बाघ के हमलों को लेकर राज्य में हल्द्वानी की फतेहपुर रेंज चर्चा में हैं। बीते चार माह में यहां छह लोगों की जान गई है। बीते हफ्ते में ही बाघ ने दो महिलाओं को चार किमी के दायरे में मार दिया। आदमखोर हो चुके इस बाघ को मारने के आदेश हो चुके हैं। बाघ के मूवमेंट पर नजर रखने के लिए वन विभाग ने फतेहपुर रेंज में 50 से ज्यादा कैमरे लगाए हैं। इसी रेंज में 16 जनवरी को बजूनिया हल्दू के पास के जंगल में नत्थूलाल नाम के व्यक्ति को बाघ ने मारा जिसके बाद वन विभाग की टीम ने इस क्षेत्र में कैमरा ट्रैप लगाए थे। कुछ समय पहले इन कैमरों में करीब 100 मीटर के दायरे में अलग-अलग जगह पर तीन बाघ दिखे हैं।
कम से कम 20 किमी का होता है दायरा
वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि सामान्य तौर पर बाघ का क्षेत्र 20 किमी का माना जाता है। कई बार बाघ 60 से 100 किमी तक अपना क्षेत्र बनाता है। अपने क्षेत्र को चिन्हित करने के लिए वह नाखून से पेड़ों पर निशान बनाता है जगह-जगह पर पेशाब भी करता है ताकि उसकी गंध से नर बाघ उसके क्षेत्र में न आए।
दो मादा और एक नर हो सकते हैं
जानकारों का कहना है कि ऐसा देखने में आया है कि कई बार दो बाघिन एक बाघ के साथ रहती हैं। कैमरा ट्रैप में दिखे तीन बाघ में से दो बाघिन हो सकती हैं। वन अधिकारी बाघों की पट्टियों का विश्लेषण कर उन्हें पहचाने की कोशिश में लगे हैं।
…तो क्या बाघिन अपने बच्चों के साथ है
वन्यजीव विशषज्ञों का यह भी मानना है कि बाघिन अपने बच्चों के साथ हो। बाघिन के बच्चे करीब दो साल तक उसके साथ रहते हैं। उनको ठीक आहार मिले तो उनकी ग्रोथ भी अच्छी होती है। अभी तक कैमरा ट्रैप में दिखे तीन बाघों को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हैं। तीन बाघ कुछ दूरी पर कैमरा ट्रैप में दिखे हैं। इनमें से आदमखोर को पहचान पाना बहुत मुश्किल हो रहा है। वन अधिकारी व विभाग के डॉक्टर भी अभी उसे चिन्हित नहीं कर पाए हैं। डब्लूआईआई की टीम विभिन्न तरीकों से आदमखोर बाघ को चिन्हित करने में लगी है। – केआर आर्या, वन क्षेत्राधिकारी, फतेहपुर रेंज