Thursday, May 14, 2026
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उत्तराखंड में शराब की बोतलों पर लगेगा नया सेस, कचरा प्रबंधन के लिए सरकार की बड़ी तैयारी

देहरादून। उत्तराखंड सरकार प्रदेश में बढ़ती कचरे की समस्या से निपटने के लिए अब नया आर्थिक मॉडल तैयार करने जा रही है। शहरी विकास विभाग ने शराब की प्रत्येक बोतल पर एक रुपये का अतिरिक्त सेस लगाने का प्रस्ताव तैयार किया है। इस राशि का उपयोग प्रदेश के सभी 108 नगर निकायों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट) को मजबूत करने के लिए किया जाएगा।

प्रदेश में तेजी से बढ़ रहे कचरे के ढेर और उसके निस्तारण की चुनौती को देखते हुए सरकार यह कदम उठाने की तैयारी में है। शहरी विकास विभाग का मानना है कि इस अतिरिक्त सेस से मिलने वाली आय नगर निकायों को आर्थिक मजबूती देगी और कचरा प्रबंधन व्यवस्था को बेहतर बनाया जा सकेगा।

मुख्य सचिव के सामने रखा जाएगा प्रस्ताव

शहरी विकास विभाग की ओर से इस संबंध में प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। सचिव शहरी विकास नितेश कुमार झा ने बताया कि नगर निकायों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और उसके रोजमर्रा के संचालन में भारी खर्च आता है। इसी को ध्यान में रखते हुए शराब की बोतलों पर एक रुपये का सॉलिड वेस्ट सेस लगाने की योजना बनाई गई है।

उन्होंने कहा कि प्रस्ताव जल्द ही मुख्य सचिव के समक्ष रखा जाएगा। सरकार का उद्देश्य है कि शहरी निकायों में कचरा प्रबंधन की व्यवस्था स्थायी और मजबूत बन सके।

पहले से लग रहा है तीन रुपये का सेस

वर्तमान में उत्तराखंड सरकार आबकारी नीति के तहत शराब की प्रत्येक बोतल पर तीन रुपये का उपकर वसूल रही है। इसमें एक रुपया गो सेवा, एक रुपया महिला कल्याण और एक रुपया खेल गतिविधियों के लिए निर्धारित है। आबकारी विभाग इसे अतिरिक्त शुल्क के रूप में वसूल करता है।

अब सरकार शहरी विकास विभाग के लिए भी एक अतिरिक्त रुपया जोड़ने की तैयारी कर रही है। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो शराब की हर बोतल पर कुल चार रुपये अतिरिक्त शुल्क लिया जाएगा।

रोजाना निकल रहा 2100 टन से अधिक कचरा

उत्तराखंड में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन लगातार गंभीर समस्या बनता जा रहा है। वर्तमान में प्रदेश में प्रतिदिन करीब 2100 टन से अधिक ठोस कचरा निकल रहा है। इसका बड़ा हिस्सा आज भी लैंडफिल साइटों पर जमा किया जा रहा है।

प्रदेशभर में 60 से अधिक डंपिंग साइट मौजूद हैं, जहां करीब 23 लाख मीट्रिक टन पुराना कचरा जमा है। स्थिति यह है कि राज्य में कुल ठोस अपशिष्ट का केवल 40 से 45 प्रतिशत हिस्सा ही वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधित हो पा रहा है।

पर्वतीय क्षेत्रों में ज्यादा चुनौती

मैदानी क्षेत्रों के मुकाबले पर्वतीय जिलों में कचरा प्रबंधन और अधिक चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। वहां कचरा एकत्र करने, ट्रांसपोर्ट करने और निस्तारण के लिए अतिरिक्त संसाधनों और बजट की आवश्यकता पड़ती है। कई नगर निकाय संसाधनों की कमी के कारण प्रभावी व्यवस्था विकसित नहीं कर पा रहे हैं।

ऐसे में सरकार का मानना है कि शराब की बोतलों पर लगाया जाने वाला नया सेस नगर निकायों के लिए स्थायी राजस्व का स्रोत बन सकता है और इससे स्वच्छता व्यवस्था में सुधार लाने में मदद मिलेगी।

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