Saturday, October 24, 2026
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हरिद्वार में संत समागम में ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ पर संवाद में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने की सहभागिता

-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्प को बल: शिवराज सिंह चौहान ने कहा- ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ आज देश की जरूरत

-वंदे मातरम: पूरा गान देश की एकता का प्रतीक, अब भारत को और विभाजित नहीं होने दिया जाएगा: शिवराज सिंह चौहान

-‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ राजनीतिक नहीं, राष्ट्रहित, सुशासन और जनकल्याण से जुड़ा राष्ट्रीय विषय: मुख्यमंत्री धामी 

-लोकतांत्रिक प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और सुव्यवस्थित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’: मुख्यमंत्री

-विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए विकास की निरंतर गति आवश्यक: मुख्यमंत्री

हरिद्वार: प्राचीन अवधूत मण्डल आश्रम में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने संत समागम को सम्बोधित करते हुए “एक राष्ट्र-एक चुनाव” की ताकत और आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने बार-बार होने वाले चुनावों को देश की प्रगति के लिए बाधक बताते हुए संत समाज से इस संवैधानिक परिवर्तन के लिए जनजागरण का आह्वान किया। उत्तराखंड मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी इस मौके पर उपस्थित रहे और केंद्रीय मंत्री के साथ जुड़कर समर्थन व्यक्त किया।

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उठाए गए इस आग्रह और संकल्प का खुलकर समर्थन करते हुए “एक राष्ट्र-एक चुनाव” की परिकल्पना को देश के हित में आवश्यक करार दिया।चौहान ने कहा कि बार-बार होने वाले चुनाव राष्ट्र की विकास गति और जनसेवा को प्रभावित कर रहे हैं और समय, पैसा तथा प्रशासनिक ऊर्जा का भारी क्षय कर रहे हैं। शिवराज सिंह ने कहा कि लगातार चुनावों के कारण स्कूलों में पढ़ाई रुकती है, प्रशासनिक मशीनरी चुनाव की तैयारियों में लग जाती है और जनता तक विकास कार्यों की गति धीमी पड़ जाती है। उन्होंने चुनावों की तैयारी पर लगने वाले समय और खर्च, जो रिपोर्ट के मुताबिक लाखों करोड़ तक पहुँचते हैं, को रोका जा सके तो देश लाभान्वित होगा। कहा कि यदि लोकसभा और विधानसभा के चुनाव साथ हों तो संसाधनों की बचत होगी, चुनाव सम्बंधी समय की बचत होगी और प्रशासनिक ध्यान विकास पर केंद्रित रहेगा।

उन्होंने संत समाज से अपील की कि वे अपनी उपस्थिति और कहने की शक्ति से जनजागरण में मदद करें। चौहान ने कहा कि संतों के आशीर्वाद और उनके शिष्यों के व्यापक प्रभाव से यह विचार देश में तेजी से फैल सकता है और राजनीतिक दलों से ऊपर उठकर राष्ट्रीय हित के लिए एक मजबूत जनप्रेरणा बन सकती है।उन्होंने यह भी निवेदन किया कि संत अपने प्रवचनों में “एक राष्ट्र-एक चुनाव” का समर्थन करें ताकि जनता में उत्साह पैदा हो और संवैधानिक संशोधन का मार्ग सुगम बने। इस दौरान केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इस विषय पर उठाए गए कदमों और विधेयक का उल्लेख करते हुए उनका समर्थन किया और कहा कि यह काम सिर्फ एक पार्टी का मुद्दा नहीं है, बल्कि पूरे देश का मुद्दा है, देश आगे रहेगा तो पार्टियाँ भी बनी रहेंगी।

चौहान ने उपस्थित संत समाज और जनता से आशीर्वाद मांगा और वंदे मातरम के पूरे स्वरूप का समर्थन करने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि संत समाज का साथ मिलने पर “एक राष्ट्र-एक चुनाव” का संकल्प पूरा हो सकता है और इससे भारत के समृद्धि, विकास व आत्मनिर्भरता के मार्ग खुलेंगे।

शिवराज सिंह चौहान ने अपने भाषण में वंदे मातरम के महत्व पर विशेष जोर दिया और कहा कि यह गीत देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है, न कि किसी पार्टी या समुदाय का। उन्होंने कहा कि देश की आजादी के पूर्व मुस्लिम लीग के दबाव में वंदे मातरम के दो टुकड़े कर दिए गए थे और वही विभाजन का एक कारण बना; अब और भारत विभाजित नहीं होने दिया जाएगा। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने संत समाज से आह्वान किया कि वे अपने प्रवचनों में वंदे मातरम के पूरे स्वरूप का समर्थन करें और जनता में यह भावना जगाएं कि देश की मातृभूमि की वंदना में कोई विवाद नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब संतों की आवाज़ से जनजागरण होगा, तो कोई भी वंदे मातरम के पूरे गान का विरोध करने का साहस नहीं कर पाएगा।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ राजनीतिक नहीं, बल्कि राष्ट्रहित, सुशासन, जनकल्याण और देश के संसाधनों के बेहतर उपयोग से जुड़ा राष्ट्रीय विषय है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और चुनाव लोकतंत्र में पर्व के समान हैं, लेकिन निरंतर चलने वाली चुनावी प्रक्रिया का प्रभाव शासन और विकास कार्यों पर भी पड़ता है।

कहा कि बार-बार चुनाव होने से आचार संहिता लागू होने के साथ बड़ी संख्या में प्रशासनिक अधिकारियों, शिक्षकों, पुलिस और सुरक्षा बलों को चुनाव संबंधी दायित्वों में लगाना पड़ता है। यदि देश में एक साथ चुनाव कराने से सार्वजनिक धन और संसाधनों की बचत होती है तथा प्रशासन को जनसेवा और विकास कार्यों के लिए अधिक समय मिलता है, तो यह लोकतंत्र को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ के विषय को राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में लाते हुए इसे आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। विकसित भारत-2047 के संकल्प को साकार करने के लिए विकास की निरंतर गति आवश्यक है। आज भारत दुनिया की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और ऐसे समय में शासन का अधिकतम समय विकास, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और आधारभूत संरचना से जुड़े कार्यों पर लगना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने पूज्य संत-महात्माओं से इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय विषय पर समाज का मार्गदर्शन करने का आग्रह करते हुए कहा कि भारत की सनातन परंपरा में संत समाज ने सदैव राष्ट्र और समाज को दिशा देने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि हमारा संकल्प है कि लोकतंत्र मजबूत हो, विकास निरंतर हो, संस्कृति सुरक्षित हो और राष्ट्र सर्वोपरि रहे।

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