Monday, February 9, 2026
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ज़मीन खरीदने से पहले तहसील में करें जाँच; ठगी के शिकार लोग सीधे SP या SSP से करें संपर्क

हल्द्वानी, 08 फ़रवरी । बिहार से आकर हल्द्वानी में ठगी का साम्राज्य खड़ा करने वाले ठेकेदार धनंजय गिरी के खिलाफ एसआईटीसाथ ने जांच शुरू कर दी है।

जमीन खरीदने-बेचने के नाम पर लोगों की जिंदगी भर की जमा-पूंजी हड़पने वाले धनंजय गिरी के काले कारनामों से अब धीरे-धीरे पर्दा उठने लगा है। नवंबर 2024 से अब तक 20 से अधिक पीड़ित एसआईटी के सामने शिकायत दर्ज करा चुके हैं। जांच में सामने आया है कि धनंजय गिरी और उसके साथियों ने लोगों से 10 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की है।हैरानी की बात यह है कि वर्ष 2018 से अब तक उसके खिलाफ धोखाधड़ी और चेक बाउंस जैसे नौ मुकदमे दर्ज हो चुके हैं और पुलिस हर मामले में चार्जशीट भी दाखिल कर चुकी है, बावजूद इसके पीड़ितों को आज तक कोई राहत नहीं मिल पाई।

पीड़ित वर्षों से थाने-चौकियों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। लेकिन अब आईजी कुमाऊं रिद्धिमअग्रवाल के हस्तक्षेप के बाद उन्हें उम्मीद की एक किरण नजर आने लगी है। आईजी के निर्देश पर गठित एसआईटी अब धोखेबाजों की संपत्ति चिन्हित कर न्यायालय के माध्यम से पीड़ितों की डूबी रकम लौटाने की तैयारी में जुट गई है।

आईजी कुमाऊं रिद्धिम अग्रवाल ने जांच में लापरवाही बरतने पर भोटिया पड़ाव चौकी प्रभारी अनिल कुमार को निलंबित कर दिया है।जांच में यह भी सामने आया है कि पिछले तीन वर्षों में धनंजय गिरी और उसके साथियों के नाम पर 80 से अधिक संपत्तियों की खरीद-फरोख्त हुई है। अब राजस्व विभाग के सहयोग से यह पता लगाया जा रहा है कि वर्तमान में कितनी संपत्तियां अभी भी उनके नाम पर दर्ज हैं। तहसील रिकॉर्ड के आधार पर न्यायालय को रिपोर्ट भेजी जाएगी।आईजी कार्यालय के अनुसार भारतीय न्याय सुरक्षा संहिता की धारा 107 के तहत धोखाधड़ी से अर्जित संपत्ति को न्यायिक प्रक्रिया के जरिए नीलाम कर पीड़ितों को उनके हिस्से के अनुसार रकम लौटाई जा सकती है।

इसके लिए जिला प्रशासन से समन्वय आवश्यक है, जिस दिशा में एसआईटी काम कर रही है।भूमि व अन्य धोखाधड़ी मामलों की जांच के लिए गठित जिला स्तरीय एसआईटी को आईजी कुमाऊं ने भंग कर दिया है। कारण यह रहा कि एसआईटी में शामिल कुछ पुलिसकर्मियों पर पूर्व में ही शिकायतें मिल चुकी थीं। अब ऐसे मामलों की प्रारंभिक जांच संबंधित क्षेत्राधिकारी (सीओ) करेंगे। साथ ही कुमाऊं के सभी जिलों से धोखाधड़ी से जुड़े मामलों की रिपोर्ट तलब की गई है।

आईजी कार्यालय का मानना है कि पूर्व में विवेचकों ने केवल धारा 41(क) के तहत नोटिस थमाकर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर ली। आरोपितों में कानून का कोई भय नहीं रहा, नतीजतन वे लगातार लोगों से ठगी करते रहे और किसी भी पीड़ित को उसकी रकम वापस नहीं मिल सकी।

धनंजय गिरी के जाल में सिर्फ आम लोग या कारोबारी ही नहीं, बल्कि एक वरिष्ठ पीसीएस अधिकारी भी फंस चुके हैं। जुलाई 2025 में काठगोदाम थाने में दर्ज मामले के अनुसार, दमुवाढूंगा मेनिर्माणाधीन हाउसिंग प्रोजेक्ट में फ्लैट दिलाने के नाम पर अधिकारी से पांच लाख रुपये एडवांस लिए गए। बाद में पता चला कि जिस फ्लैट के नाम पर एग्रीमेंट किया गया था, उसी पर धनंजय ने पहले ही बैंक से लोन ले रखा था।आईजी कुमाऊं रिद्धिम अग्रवाल ने आम लोगों से अपील की है कि भूमि खरीदने से पहले तहसील और रजिस्ट्रार कार्यालय से पूरी जांच-पड़ताल जरूर कराएं, ताकि ठगी से बचा जा सके।

उन्होंने कहा कि जिन लोगों को भी ठेकेदार धनंजय गिरी ने ठगा है, वे एसपी हल्द्वानी मनोज कत्याल, एसएसपी मंजूनाथ टीसी या पुलिस कार्यालय में संपर्क कर शिकायत दर्ज करा सकते हैं।आईजी ने यह भी बताया कि लैंड फ्रॉड में शामिल लोगों को ब्लैकलिस्ट कर उनके नाम रजिस्ट्रार कार्यालय में चस्पा कर दिए गए हैं। शासन के निर्देश पर लैंड फ्रॉड कमेटी का अध्यक्ष आयुक्त को बनाया को बनाया गया है जबकि एसआईटी रेंज कार्यालय स्तर पर गठित की गई है।

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