Tuesday, November 3, 2026
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टीओडी मॉडल और एकीकृत पार्किंग नीति से संवरेगा शहरी परिवहन

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों के क्रम में उत्तराखण्ड में शहरी परिवहन व्यवस्था को आधुनिक, सुगम और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में ठोस पहल तेज हो गई है। आवास सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में देहरादून, हरिद्वार और ऋषिकेश क्षेत्र की ई-बीआरटीएस, पीआरटी और रोपवे परियोजनाओं की मैराथन समीक्षा की गई।

बैठक में उत्तराखण्ड मैट्रो रेल कॉरपोरेशन के प्रबंध निदेशक बृजेश कुमार मिश्रा सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने परियोजनाओं की अद्यतन स्थिति का विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया। सचिव ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए एकीकृत और टिकाऊ ट्रांजिट सिस्टम विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

त्रिवेणी घाट-नीलकंठ रोपवे को मिली स्वीकृति

बैठक में जानकारी दी गई कि त्रिवेणी घाट से नीलकंठ मंदिर तक प्रस्तावित रोपवे परियोजना को आवश्यक एनओसी और अनुमोदन प्राप्त हो चुके हैं। स्टेज-1 फॉरेस्ट क्लीयरेंस हेतु आवेदन भी किया जा चुका है। यह परियोजना श्रद्धालुओं को सुगम आवागमन की सुविधा देने के साथ पर्वतीय यातायात दबाव कम करने में सहायक होगी। निजी निवेश को आकर्षित करने के लिए 30 वर्ष के कंसेशन पीरियड को बढ़ाने की संभावनाओं पर भी विचार करने के निर्देश दिए गए।

हरिद्वार में इंटीग्रेटेड रोपवे और पीआरटी सिस्टम

हरिद्वार में प्रस्तावित इंटीग्रेटेड रोपवे परियोजना (डीडीयू पार्किंग-चण्डी देवी-मनसा देवी एवं मल्टीमॉडल हब) की डीएफसी प्रक्रिया 18 फरवरी 2026 को कराने के निर्देश दिए गए। परियोजना की फिजिबिलिटी रिपोर्ट को पीपीपी सेल से वेटिंग कराने पर भी बल दिया गया।

हरिद्वार में पीआरटी परियोजना के अंतर्गत चार कॉरिडोर प्रस्तावित हैं—सीतापुर से भारत माता मंदिर, सिटी अस्पताल से दक्ष मंदिर, लालतारा चौक से भूपतवाला, गणेशपुरम से डीएवी पब्लिक स्कूल

कुल 20.73 किमी लंबाई में 21 स्टेशन प्रस्तावित हैं। तीर्थ सीजन के दौरान यातायात प्रबंधन में यह परियोजना अहम भूमिका निभा सकती है।

देहरादून में 31.52 किमी का ई-बीआरटीएस मेगा कॉरिडोर

देहरादून में प्रस्तावित ई-बीआरटीएस परियोजना के अंतर्गत आईएसबीटी से रायपुर तक 31.52 किमी लंबा कॉरिडोर विकसित किया जाएगा, जिसमें 35 स्टेशन प्रस्तावित हैं। बैठक के बाद सचिव ने अधिकारियों के साथ प्रथम कॉरिडोर का स्थलीय निरीक्षण भी किया। राजधानी में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को देखते हुए इस परियोजना को प्राथमिकता पर लेने के निर्देश दिए गए।

देहरादून में पीआरटी के तीन कॉरिडोर

देहरादून में पीआरटी परियोजना के तहत क्लेमेंटटाउन से बल्लूपुर चौक, पंडितवाड़ी से रेलवे स्टेशन तथा गांधी पार्क से आईएसबीटी पार्क तक तीन प्रमुख कॉरिडोर प्रस्तावित हैं। सचिव ने निर्देश दिए कि परियोजनाओं को ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (टीओडी) मॉडल से जोड़ा जाए, जिससे सुनियोजित शहरी विस्तार सुनिश्चित हो सके।

17 स्टेशनों का संयुक्त निरीक्षण

आईएसबीटी से मसूरी डायवर्जन तक प्रस्तावित 17 स्टेशनों का संयुक्त स्थलीय निरीक्षण किया गया। आईएसबीटी स्टेशन निर्माण के लिए 0.64 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता बताई गई, जो मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण के अधीन है। संबंधित शासकीय भूमि को शीघ्र निगम को हस्तांतरित करने के निर्देश दिए गए, ताकि निर्माण कार्य समयबद्ध शुरू हो सके।

पार्किंग पॉलिसी और समन्वित विकास पर जोर

बैठक में उत्तराखण्ड की कार पार्किंग पॉलिसी-2022 के अनुरूप सभी शहरी परिवहन परियोजनाओं में समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए गए। सचिव ने कहा कि प्रभावी पार्किंग प्रबंधन के बिना कोई भी ट्रांजिट सिस्टम सफल नहीं हो सकता।

शहरी परिवहन के नए युग की शुरुआत

डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विजन के अनुरूप उत्तराखण्ड को आधुनिक, सुरक्षित और सतत शहरी परिवहन नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। रोपवे, पीआरटी और ई-बीआरटीएस परियोजनाएं न केवल यातायात दबाव कम करेंगी, बल्कि पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति देंगी।

राज्य सरकार का लक्ष्य है कि देहरादून, हरिद्वार और ऋषिकेश क्षेत्र में आधुनिक सार्वजनिक परिवहन का सशक्त और एकीकृत नेटवर्क विकसित कर उत्तराखण्ड को ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर के मानचित्र पर नई पहचान दिलाई जाए।

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