Tuesday, November 3, 2026
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दशलक्षण महापर्व के पहले दिन उत्तम क्षमा धर्म की आराधना, आत्मबोध संस्कार शिविर में उमड़े श्रद्धालु

देहरादून। पर्वों का राजा एवं पर्वाधिराज पर्यूषण दशलक्षण महापर्व आत्मशुद्धि, संयम और आत्मबोध का स्वर्णिम अवसर है। इसी पावन अवसर पर आध्यात्मिक श्रमणी परम पूज्य वात्सल्यमयी आर्यिका रत्न श्री 105 पूर्णमति माताजी ससंघ के पावन सान्निध्य में देहरादून के गांधी रोड स्थित श्री दिगम्बर जैन पंचायती मंदिर सहित शहर के विभिन्न जैन मंदिरों में दशलक्षण महापर्व का भव्य शुभारंभ हुआ। प्रातःकाल मंदिरों में घंटियों की मधुर गूंज के साथ पूजन, प्रक्षाल, नित्य नियम पूजन एवं दशलक्षण पूजन संपन्न हुआ। इसके साथ ही भव्य आत्मबोध संस्कार शिविर का शुभारंभ किया गया, जो 16 सितंबर से 27 सितंबर तक लगातार आयोजित किया जाएगा। शिविर में देहरादून के साथ-साथ बाहर से आए 300 से अधिक श्रद्धालुओं ने सहभागिता की।

इस अवसर पर पूज्य माता पूर्णमति माताजी ने अपने आशीर्वचन में कहा कि उत्तम क्षमा धर्म जैन धर्म के दशलक्षण महापर्व का प्रथम एवं अत्यंत महत्वपूर्ण धर्म है। यह मनुष्य को क्रोध पर विजय प्राप्त करने और अपने अंतर्मन को निर्मल बनाने का मार्ग दिखाता है। क्षमा का अर्थ केवल किसी को माफ करना नहीं, बल्कि मन में किसी के प्रति बैर, द्वेष अथवा बदले की भावना न रखना है। उन्होंने कहा कि क्षमा आत्मबल का प्रतीक है, कमजोरी नहीं। प्रतिकूल परिस्थितियों एवं दुर्व्यवहार के बावजूद अपने स्वभाव को शांत बनाए रखना ही सच्ची क्षमा है। क्षमा धारण करने से मन को शांति मिलती है और आत्मिक शक्ति का विकास होता है।

दोपहर में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में मंगलाचरण के साथ झंडा मंदिर द्वारा ‘मेरी भावना’ पर आधारित भावपूर्ण एवं प्रेरणादायी नाटिका का मंचन किया गया। श्रद्धालुओं ने नाटिका के माध्यम से धर्म, आत्मचिंतन एवं सद्भावना का संदेश ग्रहण किया।

आत्मबोध संस्कार शिविर के अंतर्गत आचार्य भक्ति, सामायिक, शंका समाधान, प्रतिक्रमण, जैन धर्म पर मार्मिक प्रवचन, तत्त्वार्थ सूत्र का अध्ययन, महाआरती, दस धर्मों पर प्रवचन, ‘द आर्ट ऑफ सेल्फ-डिस्कवरी’ ध्यान शिविर तथा प्रश्न मंच सहित विभिन्न आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। ध्यान शिविर में बा.ब्र. ऋतु दीदीजी द्वारा श्रद्धालुओं को आत्मचिंतन एवं आत्म-अन्वेषण के लिए प्रेरित किया गया। कार्यक्रम की जानकारी देते हुए मीडिया कोऑर्डिनेटर मधु जैन ने बताया कि 17 सितंबर को उत्तम आर्जव धर्म के अवसर पर दोपहर में छोटे बच्चों द्वारा मंगलाचरण प्रस्तुत किया जाएगा। इसके पश्चात जैन मिलन एकता, दिगम्बर जैन महासमिति एवं आंचल महिला जैन मिलन के संयुक्त तत्वावधान में रात्रि 8.30 बजे गांधी रोड स्थित जैन भवन में “अब पछताए क्या हो, जब चिड़िया चुग गई खेत” विषय पर नाटिका का मंचन किया जाएगा।

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