नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने महर्षि दयानंद सरस्वती की जयंती पर उनका पुण्य स्मरण करते हुए नमन किया। उन्होंने कहा कि मां भारती की सेवा में आजीवन समर्पित रहे महर्षि दयानंद का जीवन ज्ञान, सेवा और सामाजिक सुधार का प्रतीक है। उन्होंने शिक्षा के प्रसार के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और परंपरा को समृद्ध करने में अतुलनीय योगदान दिया। प्रधानमंत्री ने एक्स पोस्ट में कहा कि महर्षि दयानंद सरस्वती के सामाजिक सुधार के प्रयास देशवासियों के लिए सदैव प्रेरणापुंज बने रहेंगे। उन्होंने उनके योगदान को राष्ट्र निर्माण से जोड़ते हुए नमन किया। इससे पहले प्रधानमंत्री ने एक अन्य पोस्ट में ज्ञान के महत्व को बताते हुए संस्कृत में सुभाषित साझा किया। उन्होंने कहा कि ज्ञान का दीपक न केवल अज्ञान के अंधकार को मिटाता है, बल्कि समस्त जगत को आलोकित भी करता है। उन्होंने महर्षि दयानंद सरस्वती के दिव्य व्यक्तित्व को इसका साक्षात उदाहरण बताया। प्रधानमंत्री ने एक्स पर संस्कृत श्लोक साझा किया, ऊर्ध्वमूलमधःशाखमश्वत्थं प्राहुरव्ययम्। छन्दांसि यस्य पर्णानि यस्तं वेद स वेदवित्।। प्रधानमंत्री ने इस सुभाषित में सृष्टि को एक ऐसे अश्वत्थ वृक्ष के रूप में बताया, जिसकी जड़ ऊपर और शाखाएं नीचे हैं। इसके पत्तों को वेद कहा गया है। जो इसके तत्व को जान लेता है, वही सच्चा ज्ञानी माना जाता है।