देहरादून के बड़े ग्रोसरी स्टोरों में पैक्ड दालें खुली दालों की तुलना में दोगुने से भी अधिक दामों में बिक रही हैं। कंपनियां अपना लेबल लगाकर अपने हिसाब से रेट तय कर रही हैं। खुली दालों की तुलना में 50 से 100 फीसदी तक कीमतें ज्यादा हैं। फुटकर की दुकानों में तोलकर दाल मिलती है। जबकि ग्रोसरी स्टोरों पर पैक्ड दालें ज्यादा बिकती हैं। इसमें आधा, एक और दो किलो तक के पैकेट रहते हैं। पैक्ड दालों के रेट बाजार में मिल रही खुली दालों की तुलना में काफी अधिक है। ऐसे में आम और मध्यम वर्गीय लोग खुली दालें ही खरीदना पसंद कर रहे हैं। खासकर 25 किलो से कम की पैकिंग पर जीएसटी लगने के बाद खुली दालों की बिक्री बढ़ गई है।
छूट देकर लुभा रहे स्टोर
ग्रोसरी स्टोर ग्राहकों को छूट देकर लुभा रहे हैं। मान लीजिए कोई ग्राहक ग्रोसरी स्टोर से राजमा खरीदता है, जिसके एक किलो के पैकेट पर 220 रुपये एमआरपी लिखी है। अब स्टोर ग्राहक को 25 से 30 फीसदी की छूट दे रहे हैं। ऐसे में ग्राहक को 25 फीसदी छूट के साथ एक किलो राजमा 165 रुपये की पड़ेगी। जबकि बाजार में खुली राजमा 100 रुपये किलो चल रही है।
पांच फीसदी जीएसटी से भी रेट बढ़े
हाल ही में 25 किलो ग्राम से कम की पैकिंग वाले खाद्य उत्पादों पर पांच प्रतिशत जीएसटी लग गयी है। ऐसे में पैक्ड दाल के रेट पांच फीसदी और बढ़ गए हैं। अन्य पैक्ड उत्पादों के रेट में भी इजाफा हुआ है।
कारोबारियों ने ये बताई दाम बढ़ने की वजह
कारोबारी गर्वित गुप्ता का कहना है कि पैकेट में दालों की कॉस्ट बढ़ जाती है। इसमें लेवर चार्ज, पैकिंग चार्ज और साफ-सफाई शामिल है। वहीं पैकेट में दालों को अलग-अलग कैटगरी में बेचा जाता है। क्वालिटी का ध्यान रखा जाता है। पांच फीसदी जीएसटी लगने से भी दालों के दाम बढ़ गए हैं। आढ़त बाजार होलसेल डीलर्स एसोसिएशन के सचिव विनोद गोयल का कहना है कि आढ़त बाजार के रेट सामान्य रहते हैं। बड़े स्टोर लैबलिंग और पैकेजिंग करके सामान बेचते हैं। ऐसे में दाम ज्यादा हो जाते हैं।