नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने कार्बेट टाइगर रिजर्व के अंतर्गत कालागढ़ टाइगर रिजर्व प्रभाग में पाखरो टाइगर सफारी के निर्माण पर रोक लगा दी है। साथ ही, इस बहुचर्चित प्रकरण की विभिन्न पहलुओं से जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की है। इसमें देश के महानिदेशक वन, महानिदेशक वन्यजीव व महानिदेशक प्रोजेक्ट टाइगर को शामिल किया गया है। एनजीटी ने कमेटी को एक माह के भीतर अपनी रिपोर्ट केंद्रीय वन पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सचिव को सौंपने के आदेश दिए हैं। साथ ही स्पष्ट किया है कि तब तक टाइगर सफारी का कोई कार्य नहीं होगा।
यह है प्रकरण
पूर्ववर्ती त्रिवेंद्र सरकार के कार्यकाल में कालागढ़ टाइगर रिजर्व प्रभाग के पाखरो में 106 हेक्टेयर वन क्षेत्र में टाइगर सफारी के निर्माण का निश्चय किया गया। इसके पीछे मंशा कार्बेट टाइगर रिजर्व पर सैलानियों का दबाव करने की थी। यह प्रकरण तब सुर्खियों में आया, जब सफारी के निर्माण में पर्यावरणीय मानकों की अनदेखी और बड़े पैमाने पर पेड़ कटान की शिकायत पर राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण की टीम ने स्थलीय निरीक्षण किया। प्राधिकरण ने शिकायतों को सही पाते हुए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए। बाद में विभागीय जांच में भी शिकायतों को सही पाया गया। इस प्रकरण में तत्कालीन मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक जेएस सुहाग और कालागढ़ के तत्कालीन डीएफओ किशन चंद को निलंबित कर दिया गया था। दोनों अधिकारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं। साथ ही कार्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक राहुल से कुछ समय बाद वन मुख्यालय से संबद्ध किया गया था। सुप्रीम कोर्ट की सेंट्रल इंपावर्ड कमेटी (सीईसी) ने भी इस प्रकरण पर कड़ा रुख अपनाया था।
एनजीटी ने स्वत: लिया संज्ञान
टाइगर सफारी के लिए पाखरो में कितने पेड़ कटे, इसका भारतीय वन सर्वेक्षण से सर्वे कराया गया। इसमें बात सामने आई कि स्वीकृत 163 पेड़ों के सापेक्ष क्षेत्र में 6093 पेड़ काटे गए। यद्यपि, वन विभाग ने इस बारे में कुछ बिंदुओं पर स्पष्टता चाही गई। इस बीच हाल के दिनों में यह मामला तूल पकड़ा और एनजीटी ने इस प्रकरण का स्वत: संज्ञान लेते हुए इस पर सुनवाई की। 21 अक्टूबर को एनजीटी ने टाइगर सफारी के निर्माण पर रोक लगाते हुए इसके विविध पहलुओं की जांच के लिए कमेटी गठित की। राज्य के मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक डा समीर सिन्हा ने इसकी पुष्टि की। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष टाइगर सफारी का प्रकरण सामने आने के बाद से वहां कार्य बंद है।