नैनीताल। हाईकोर्ट ने हरिद्वार जिले में पशुवध पर लगी रोक को बरकरार रखा है। मामले की अगली सुनवाई अगस्त में होगी। सुनवाई दौरान याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि राज्य सरकार पूरे जिले में पशुवध पर प्रतिबंध नहीं लगा सकती क्योंकि यह संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है। सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि राज्य सरकार ने मांस खाने व बेचने पर प्रतिबंध नहीं लगाया है, केवल पशुवध पर प्रतिबंध लगाया है। इसलिए किसी के अधिकारों का कोई हनन नहीं हुआ है। सरकार को यह अधिकार है कि वह धार्मिक स्थलों में पशुवध पर रोक लगा सकती है।
मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार सरकार ने 3 मार्च 2021 में शासनादेश जारी कर हरिद्वार जिले में पशुवध पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगा दिया था। पहले धार्मिक स्थलों तक ही यह आदेश लागू था। इसके खिलाफ मंगलौर निवासी इफ्तिकार और अन्य ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि सरकार धार्मिक स्थलों में मांस की बिक्री प्रतिबंधित कर सकती है लेकिन पूरे जिले में इस पर प्रतिबंध नहीं लगा सकती है। यह उनका सांविधानिक अधिकार है। सरकार का यह आदेश अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव करने वाला है। याचिका में यह भी कहा गया कि मंगलौर, रुड़की में 87 प्रतिशत मुस्लिम रहते हैं। इसलिए बकरीद पर उन्हें पशुवध करने की इजाजत दी जाए।