Saturday, January 17, 2026
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Al-Falah University: एआईयू ने रद्द की अल-फलाह यूनिवर्सिटी की सदस्यता, प्रशासन ने बंद की आधिकारिक वेबसाइट

नई दिल्ली। उच्च शिक्षा जगत से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज़ (AIU) ने फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी की सदस्यता तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी है। एआईयू ने अपने बयान में कहा कि विश्वविद्यालय से जुड़े हाल के घटनाक्रम संस्था के मानकों और आचरण के अनुरूप नहीं हैं।

इस कार्रवाई के बाद अल-फलाह यूनिवर्सिटी प्रशासन ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट बंद कर दी है, जिससे छात्रों और कर्मचारियों को ऑनलाइन सेवाओं का उपयोग करने में दिक्कत आ रही है।


📜 एआईयू का बयान

भारतीय विश्वविद्यालय संघ (AIU) ने जारी बयान में कहा,

“एआईयू के उपनियमों के अनुसार किसी भी विश्वविद्यालय की सदस्यता तब तक मान्य रहती है जब तक वह ‘सद्भावपूर्ण स्थिति’ में कार्य कर रहा हो। मीडिया में प्रकाशित रिपोर्टों और प्राप्त सूचनाओं के आधार पर यह पाया गया है कि फरीदाबाद, हरियाणा स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी वर्तमान में उस स्थिति में नहीं है। इसलिए, एआईयू ने विश्वविद्यालय की सदस्यता को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का निर्णय लिया है।”


🏫 प्रशासन ने वेबसाइट की पहुंच रोकी

एआईयू की कार्रवाई के बाद अल-फलाह यूनिवर्सिटी की वेबसाइट फिलहाल काम नहीं कर रही है। वेबसाइट पर लॉगिन करने की कोशिश करने पर “Access Denied” या “Under Maintenance” का संदेश दिख रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस पर अभी कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।


📘 एआईयू की भूमिका

एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज़ (AIU) भारत में विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा संस्थानों का एक प्रमुख संगठन है। यह संस्था शैक्षणिक सहयोग, मान्यता, और अनुसंधान आदान-प्रदान को बढ़ावा देती है। किसी भी विश्वविद्यालय की सदस्यता रद्द होना उसकी शैक्षणिक प्रतिष्ठा के लिए गंभीर मामला माना जाता है।


⚠️ विशेषज्ञों की राय

शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि एआईयू की इस कार्रवाई से अल-फलाह यूनिवर्सिटी की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है। यदि विश्वविद्यालय ने स्थिति स्पष्ट नहीं की या सुधारात्मक कदम नहीं उठाए, तो यह मामला विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) तक भी पहुंच सकता है।


🔍 निष्कर्ष

एआईयू द्वारा की गई यह कार्रवाई भारतीय उच्च शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और अनुशासन सुनिश्चित करने की दिशा में एक सख्त कदम माना जा रहा है। अब सभी की नजरें अल-फलाह यूनिवर्सिटी प्रशासन पर हैं कि वह इस मामले में क्या प्रतिक्रिया देता है और आगे क्या कदम उठाता है।

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