Saturday, November 29, 2025
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समुद्री मोर्चे पर भारत की ताकत में इजाफा: नौसेना को मिली ब्रह्मोस से लैस स्टेल्थ फ्रिगेट ‘तारागिरि’, आत्मनिर्भर भारत का बड़ा कदम

भारतीय नौसेना को समुद्री सुरक्षा और युद्धक क्षमता को मजबूत करने वाला एक और आधुनिक स्वदेशी युद्धपोत मिल गया है। प्रोजेक्ट-17A के तहत तैयार की गई नीलगिरि श्रेणी की उन्नत स्टेल्थ फ्रिगेट ‘तारागिरि’ को मझगांव डॉक शिपबिल्डिंग लिमिटेड (एमडीएल) ने 28 नवंबर को मुंबई स्थित नौसेना को औपचारिक रूप से सौंप दिया।
रक्षा मंत्रालय ने इसे आत्मनिर्भर भारत मिशन के तहत युद्धपोत निर्माण में बड़ी उपलब्धि बताया है।

पुरानी ‘तारागिरि’ का आधुनिक और शक्तिशाली संस्करण

नई ‘तारागिरि’ उस पुराने युद्धपोत का अत्याधुनिक रूप है, जिसने 1980 से 2013 तक पूरे 33 वर्षों तक नौसेना में अपनी सेवाएं दी थीं।
नया संस्करण बेहतर स्टेल्थ क्षमता, उन्नत हथियार प्रणालियों, अत्याधुनिक सेंसर और उच्च सर्वाइवेबिलिटी फीचर्स से लैस है, जो इसे भविष्य की समुद्री चुनौतियों से निपटने के लिए विशेष रूप से सक्षम बनाता है।

प्रोजेक्ट-17A: भविष्य के युद्धपोतों का आधार

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, प्रोजेक्ट-17A के युद्धपोतों को मौजूदा और आने वाली समुद्री चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है।
इन जहाजों में P-17 (शिवालिक क्लास) की तुलना में कई उन्नत तकनीकी अपग्रेड शामिल हैं, जिनसे इनकी युद्ध क्षमता पहले से कहीं अधिक बढ़ जाती है।

ब्रह्मोस से लेकर एमआरएसएएम तक—तारागिरि का दमदार हथियार सिस्टम

तारागिरि को अत्याधुनिक हथियारों और सेंसर प्रणालियों से लैस किया गया है, जिनमें शामिल हैं—

  • ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल

  • MF-STAR रडार सिस्टम

  • MRSAM एयर डिफेंस सिस्टम

  • 76 मिमी सुपर रैपिड गन माउंट

  • 30 मिमी और 12.7 मिमी क्लोज-इन वेपन सिस्टम

  • पनडुब्बी रोधी टॉरपीडो और रॉकेट सिस्टम

इनसे यह फ्रिगेट हवा, सतह और पानी के भीतर—तीनों मोर्चों पर दुश्मन को मात देने में सक्षम है।

निर्माण समय घटा, परियोजना में बढ़ी रफ्तार

एमडीएल ने पहले दो जहाजों से मिले अनुभव के आधार पर ‘तारागिरि’ का निर्माण समय घटाकर 93 महीनों से 81 महीने कर दिया।
यह पिछले 11 महीनों में नौसेना को सौंपा गया प्रोजेक्ट-17A का चौथा युद्धपोत है।
परियोजना के शेष तीन जहाज अगस्त 2026 तक भारतीय नौसेना को चरणबद्ध तरीके से मिल जाएंगे।

75% स्वदेशी हिस्सेदारी, हजारों को रोजगार

रक्षा मंत्रालय ने बताया कि इस परियोजना में 75% स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है।
इसके साथ ही—

  • 200 से अधिक MSMEs जुड़े,

  • 4,000 लोगों को सीधा रोजगार,

  • और 10,000 से अधिक लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिला है।

यह युद्धपोत भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता को नई ऊंचाइयों पर पहुँचा रहा है।

युद्धपोत ‘तारागिरि’ की मुख्य खूबियां

  • वजन: 3510 टन

  • डिस्प्लेसमेंट: 6670 टन

  • लंबाई: 149 मीटर

  • चौड़ाई: 17.8 मीटर

  • गति: 28 नॉट (लगभग 52–59 किमी/घंटा)

  • इंजन: दो गैस टर्बाइन + दो डीजल इंजन

  • तैनाती क्षमता: 35 अधिकारी और 150 नौसैनिक

यह फ्रिगेट समुद्री गश्त, पनडुब्बी रोधी अभियानों, निगरानी मिशन और युद्धक कार्रवाई के लिए अत्यंत सक्षम माना जा रहा है।

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