Monday, January 5, 2026
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उत्तराखंड में परिवार रजिस्टर गड़बड़ियों पर धामी सरकार सख़्त, 2003 से अब तक प्रदेशव्यापी जांच के आदेश

देहरादून।
उत्तराखंड में परिवार/कुटुंब रजिस्टर में सामने आ रही अनियमितताओं को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सख़्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक में प्रदेशभर में परिवार रजिस्टरों की व्यापक जांच कराने के निर्देश जारी किए गए हैं। सरकार ने साफ किया है कि सरकारी अभिलेखों में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या छेड़छाड़ को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

बैठक में मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि प्रदेश के सभी जिलों में मौजूद परिवार और कुटुंब रजिस्टरों की प्रतियां तत्काल संबंधित जिलाधिकारियों के पास सुरक्षित रखी जाएं, ताकि रिकॉर्ड में किसी तरह की हेराफेरी की संभावना समाप्त हो सके। साथ ही यह निर्णय लिया गया कि रजिस्टरों की गहन जांच सीडीओ और एडीएम स्तर के अधिकारियों द्वारा कराई जाएगी, जिससे जांच प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष बनी रहे।

सीएम धामी ने कहा कि जांच का दायरा वर्ष 2003 से वर्तमान समय तक रखा जाएगा, ताकि बीते वर्षों में हुई संभावित अनियमितताओं की भी पहचान की जा सके। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर परिवार रजिस्टर में नाम दर्ज कराने वालों के खिलाफ नियमानुसार विभागीय और कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने बताया कि परिवार रजिस्टर का पंजीकरण और प्रतिलिपि संबंधी सेवाएं पंचायत राज (कुटुंब रजिस्टरों का अनुरक्षण) नियमावली, 1970 के अंतर्गत संचालित होती हैं। नियमों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करने वाले प्रत्येक परिवार का नाम परिवार/कुटुंब रजिस्टर में दर्ज होना अनिवार्य है। साथ ही रजिस्टर में दर्ज प्रविष्टियों के शुद्धिकरण और नए नाम जोड़ने की प्रक्रिया का भी प्रावधान है, जिसे अब और अधिक सख़्त तथा पारदर्शी बनाए जाने की तैयारी की जा रही है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि परिवार रजिस्टर में नाम दर्ज करने का अधिकार सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) को प्राप्त है, जबकि इससे संबंधित अपील का अधिकार उप जिलाधिकारी के पास निहित है। वर्तमान में परिवार रजिस्टर से जुड़ी सेवाएं ‘अपणी सरकार’ पोर्टल के माध्यम से भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।

जनसांख्यिकीय संतुलन को लेकर चिंता

बैठक में यह भी सामने आया कि पिछले कुछ वर्षों में राज्य की सीमा से लगे मैदानी जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों में अनधिकृत बसावट के आधार पर परिवार रजिस्टर में नाम दर्ज किए जाने के मामले सामने आए हैं। इससे राज्य के जनसांख्यिकीय संतुलन के प्रभावित होने की आशंका जताई गई है। इसी कारण सरकार द्वारा परिवार रजिस्टर से जुड़ी नियमावली में आवश्यक संशोधन की आवश्यकता महसूस की गई है।

पंचायती राज विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में परिवार रजिस्टर से संबंधित सेवाओं के लिए प्रदेशभर से बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त हुए। एक अप्रैल से 31 दिसंबर 2025 के बीच नए परिवार जोड़ने के लिए कुल 2,66,294 आवेदन आए, जिनमें से 2,60,337 आवेदन स्वीकृत किए गए, जबकि 5,429 आवेदन नियमों के उल्लंघन और अधूरे दस्तावेजों के कारण निरस्त कर दिए गए।

विशेषज्ञों का मानना है कि निरस्त किए गए आवेदनों की संख्या फर्जी प्रविष्टियों की आशंका की ओर संकेत करती है। इसी को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने सीमावर्ती जिलों सहित प्रदेश के सभी जिलों में समान रूप से जांच कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही भविष्य में परिवार रजिस्टर में नाम दर्ज करने की प्रक्रिया को एक स्पष्ट नीति के तहत नियंत्रित करने और प्रस्ताव को कैबिनेट के समक्ष लाने का भी निर्णय लिया गया है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दो टूक कहा कि सरकारी अभिलेखों से खिलवाड़ किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख़्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

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