Monday, November 2, 2026
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जाति जनगणना पर स्टालिन का पीएम मोदी से आग्रह: सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों की भागीदारी से बने परामर्शी तंत्र

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने आगामी जनगणना में जाति आधारित आंकड़ों को शामिल किए जाने के संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से परामर्शी और समावेशी व्यवस्था बनाने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा है कि जाति जनगणना जैसे संवेदनशील विषय पर निर्णय लेते समय सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को शामिल किया जाना चाहिए, ताकि एकत्र किया गया डेटा सटीक, स्पष्ट और भरोसेमंद हो।

मुख्यमंत्री स्टालिन ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा कि जातियों से जुड़े सवाल, उनके वर्ग और उपवर्ग तथा आंकड़े एकत्र करने की पद्धति पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए। यदि इस प्रक्रिया में स्पष्टता और सावधानी नहीं बरती गई तो इससे गलत आंकड़े सामने आ सकते हैं, जिससे सामाजिक तनाव और विभाजन बढ़ने की आशंका रहेगी।

उन्होंने कहा कि जनगणना भले ही केंद्र सरकार का विषय हो, लेकिन इसके परिणाम राज्यों की शिक्षा नीति, रोजगार, आरक्षण व्यवस्था और कल्याणकारी योजनाओं पर गहरा प्रभाव डालते हैं। ऐसे में केंद्र सरकार को सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से व्यापक परामर्श लेना चाहिए, ताकि क्षेत्रीय और सामाजिक विविधताओं को ध्यान में रखते हुए संतुलित निर्णय लिया जा सके और संघीय ढांचे को मजबूती मिले।

स्टालिन ने यह भी सुझाव दिया कि जाति जनगणना से पहले पायलट परीक्षण जैसे कदम उठाए जाने चाहिए, जिससे आंकड़ों की विश्वसनीयता सुनिश्चित हो सके और सामाजिक न्याय को सही दिशा में बढ़ावा मिले। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह प्रक्रिया देश में समानता और समावेशिता की प्रतिबद्धता को और मजबूत करेगी।

गौरतलब है कि तमिलनाडु लंबे समय से जाति आधारित जनगणना की मांग करता रहा है। राज्य विधानसभा भी इस संबंध में केंद्र सरकार से प्रस्ताव पारित कर चुकी है। मुख्यमंत्री स्टालिन ने कहा कि जाति विवरण को जनगणना में शामिल करना साक्ष्य आधारित नीति निर्माण और सामाजिक न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

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