Saturday, October 24, 2026
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गंगा बेसिन में घड़ियाल संरक्षण की उम्मीद: सर्वे में 3037 घड़ियाल मिले, चंबल नदी शीर्ष पर

देहरादून।
गंगा बेसिन में अत्यंत संकटग्रस्त प्रजाति घड़ियाल के संरक्षण को लेकर राहत देने वाली तस्वीर सामने आई है। गंगा बेसिन में किए गए विस्तृत सर्वेक्षण में कुल 3037 घड़ियाल पाए गए हैं। यह सर्वे 22 नदियों में किया गया, जिनमें से 13 नदियों में घड़ियालों की मौजूदगी दर्ज की गई। सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, चंबल नदी में घड़ियालों की संख्या सबसे अधिक है। वहीं उत्तराखंड में केवल रामगंगा नदी में घड़ियालों की उपस्थिति मिली है।

यह जानकारी गंगा बेसिन में अत्यंत संकटग्रस्त घड़ियाल की जनसंख्या स्थिति एवं संरक्षण कार्ययोजना विषय पर जारी रिपोर्ट में सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, लगातार बढ़ते मानवीय हस्तक्षेप और पर्यावरणीय चुनौतियों के बावजूद कुछ नदियों में घड़ियालों की आबादी अभी भी बनी हुई है।

7680 किलोमीटर क्षेत्र में हुआ सर्वे
घड़ियालों की संख्या और उनके आवास की स्थिति का आकलन करने के लिए भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) ने नवंबर 2020 से मार्च 2023 के बीच व्यापक सर्वेक्षण किया। इस दौरान गंगा बेसिन की 22 नदियों में करीब 7680 किलोमीटर नदी क्षेत्र का सर्वे किया गया। सर्वे के परिणामस्वरूप 13 नदियों में कुल 3037 घड़ियाल (हेड काउंट) दर्ज किए गए।

चंबल, घाघरा और गिरवा नदी में अधिक संख्या
रिपोर्ट के अनुसार,

  • चंबल नदी में सर्वाधिक 2097 घड़ियाल,

  • घाघरा नदी में 463 घड़ियाल,

  • गिरवा नदी में 158 घड़ियाल पाए गए।

उत्तराखंड में घड़ियालों की स्थिति सीमित है। यहां केवल रामगंगा नदी (कॉर्बेट टाइगर रिजर्व क्षेत्र) में 48 घड़ियाल दर्ज किए गए हैं।

खास परिस्थितियों में ही जीवित रह पाते हैं घड़ियाल
सर्वे से जुड़े बायोलॉजिस्ट आशीष पांडा के अनुसार, घड़ियाल बेहद संवेदनशील प्रजाति है। इसके अस्तित्व के लिए उपयुक्त तापमान, स्वच्छ और शांत पानी तथा कम मानवीय हस्तक्षेप आवश्यक होता है। घड़ियाल सीमित आहार लेते हैं और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या शोरगुल को सहन नहीं कर पाते।

उन्होंने बताया कि रेत खनन, नदियों में छोड़े गए मछली पकड़ने के जाल, और तेजी से बढ़ता जल प्रदूषण घड़ियालों के लिए सबसे बड़ी चुनौतियां हैं। कई बार खराब हो चुके मछली पकड़ने के जाल नदियों में फेंक दिए जाते हैं, जिनमें फंसकर घड़ियालों की मौत हो जाती है।

संरक्षण के लिए टास्कफोर्स गठन की सिफारिश
रिपोर्ट में घड़ियाल संरक्षण को लेकर कई अहम सुझाव दिए गए हैं। इनमें घड़ियाल संरक्षण से जुड़ी सभी संस्थाओं के समन्वय के लिए एक विशेष टास्कफोर्स बनाने की सिफारिश की गई है। इसके साथ ही नदियों में जाल न फेंकने को लेकर जागरूकता अभियान, आधुनिक तकनीक के माध्यम से निगरानी, और प्रदूषण नियंत्रण पर विशेष जोर दिया गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नदियों की स्थिति में सुधार किया जाए और प्रदूषण कम हो, तो भविष्य में सोन, कोसी और गंडक जैसी नदियों में भी घड़ियालों की संख्या बढ़ सकती है।

इस अध्ययन में भारतीय वन्यजीव संस्थान की संकाय अध्यक्ष डॉ. रुचि बडोला, डॉ. शिवानी बर्थवाल, डॉ. एस.ए. हुसैन सहित कई वैज्ञानिक और विशेषज्ञ शामिल रहे।

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