Friday, January 23, 2026
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उत्तराखंड में यूसीसी की डिजिटल पहल: एआई की मदद से 23 भाषाओं में उपलब्ध सेवाएं, तकनीकी उत्कृष्टता की मिसाल

देहरादून। उत्तराखंड सरकार द्वारा लागू की गई समान नागरिक संहिता (यूसीसी) देशभर में डिजिटल नवाचार और सुशासन का उदाहरण बनती जा रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि यूसीसी के क्रियान्वयन के दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखा गया कि आम नागरिकों को पंजीकरण और प्रक्रिया समझने में किसी भी तरह की कठिनाई न हो। इसी उद्देश्य से यूसीसी की सभी सेवाओं को अत्याधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की सहायता से सरल बनाया गया है।

राज्य में यूसीसी से जुड़ी सेवाएं अब अंग्रेजी के साथ-साथ भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल सभी 22 भाषाओं में उपलब्ध हैं। इस तरह कुल 23 भाषाओं में नागरिक यूसीसी से संबंधित नियम, प्रक्रिया और आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा, आवेदक अपनी पसंदीदा भाषा में ही ऑनलाइन आवेदन और पंजीकरण की प्रक्रिया भी पूरी कर सकते हैं।

मुख्यमंत्री धामी ने बताया कि यूसीसी लागू करने से पहले अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि वेबसाइट पूरी तरह यूजर-फ्रेंडली हो और पंजीकरण की प्रक्रिया अत्यंत सरल रखी जाए। लक्ष्य यह था कि कोई भी व्यक्ति बिना किसी तकनीकी सहायता के स्वयं ही अपना पंजीकरण कर सके। इसी क्रम में सूचना प्रौद्योगिकी विकास एजेंसी (आईटीडीए) ने यूसीसी की वेबसाइट को बहुभाषी स्वरूप में विकसित किया।

यूसीसी पोर्टल पर असमिया, बंगाली, गुजराती, हिंदी, कन्नड़, कश्मीरी, कोंकणी, मलयालम, मराठी, नेपाली, उड़िया, पंजाबी, संस्कृत, तमिल, तेलुगु, उर्दू, सिंधी, बोडो, डोगरी, मैथिली, संथाली और मणिपुरी भाषाओं में सेवाएं उपलब्ध कराई गई हैं। साथ ही, एआई आधारित सहायता प्रणाली के जरिए आवेदक पूरी प्रक्रिया को आसानी से समझ सकते हैं और अपनी शंकाओं का समाधान भी प्राप्त कर सकते हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, “हमारी सरकार शुरू से ही ‘सरलीकरण से समाधान’ के सिद्धांत पर काम कर रही है। समान नागरिक संहिता के क्रियान्वयन में यह सुनिश्चित किया गया कि आम जनता को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो। यूसीसी आज तकनीकी उत्कृष्टता का एक सफल मॉडल बनकर उभरी है। यही वजह है कि बीते एक वर्ष में यूसीसी प्रक्रिया को लेकर कोई भी शिकायत दर्ज नहीं हुई है।”

राज्य सरकार का मानना है कि यह बहुभाषी और एआई आधारित डिजिटल व्यवस्था न केवल पारदर्शिता और सुगमता को बढ़ावा देती है, बल्कि उत्तराखंड को ई-गवर्नेंस के क्षेत्र में अग्रणी राज्यों की कतार में भी खड़ा करती है।

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