Tuesday, November 3, 2026
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उत्तराखंड में पेयजल की होगी जैविक जांच, सभी लैब में माइक्रोबायोलॉजी टेस्टिंग शुरू करने की तैयारी

देहरादून। उत्तराखंड में पेयजल की गुणवत्ता को लेकर सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। नदियों, गाड़-गदेरों और अन्य जल स्रोतों में खतरनाक जीवाणु, वायरस, कवक और परजीवियों की आशंका को देखते हुए अब प्रदेश की सभी अधिकृत प्रयोगशालाओं में पेयजल की माइक्रोबायोलॉजी जांच शुरू की जाएगी। हाल ही में दूसरे राज्यों में दूषित पानी से हुई गंभीर घटनाओं के बाद यह कदम एहतियात के तौर पर उठाया जा रहा है।

प्रदेश में जल गुणवत्ता परीक्षण के लिए कुल 27 प्रयोगशालाएं कार्यरत हैं, जिनमें 13 जिलास्तरीय, एक राज्यस्तरीय और 13 उपखंडीय लैब शामिल हैं। अभी तक इन लैबों में पानी की केवल फिजियो-केमिकल जांच—जैसे पीएच, टीडीएस, क्लोराइड, फ्लोराइड और आयरन—की ही सुविधा उपलब्ध थी। अब इनमें जैविक प्रदूषण की पहचान के लिए माइक्रोबायोलॉजिकल परीक्षण भी जोड़ा जाएगा।

ये सभी प्रयोगशालाएं नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लैबोरेटरीज (NABL) से मान्यता प्राप्त हैं, लेकिन माइक्रोबायोलॉजी जांच के लिए अलग से मान्यता लेना जरूरी है। संबंधित विभाग ने इसके लिए प्रक्रिया शुरू कर दी है।

सरकार ने माइक्रोबायोलॉजी परीक्षण सुविधा विकसित करने के लिए 192 लाख रुपये का बजट जारी किया है। इस बजट से प्रयोगशालाओं में बायोसेफ्टी कैबिनेट, इंक्यूबेटर, ऑटोक्लेव, मेंब्रेन फिल्ट्रेशन असेंबली, कॉलोनी काउंटर, सूक्ष्मदर्शी और अन्य आवश्यक उपकरण खरीदे जाएंगे।

अधिकारियों का कहना है कि उपकरण स्थापित होने और मान्यता प्रक्रिया पूरी होने के बाद सभी लैबों में नियमित माइक्रोबायोलॉजी जांच शुरू कर दी जाएगी। इससे जल स्रोतों में मौजूद हानिकारक जीवाणुओं की समय पर पहचान हो सकेगी और जलजनित बीमारियों की रोकथाम में मदद मिलेगी।

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