उत्तराखंड सरकार ने राज्य में साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। वन एवं पर्यटन विभाग की पहल पर गढ़वाल और कुमाऊं हिमालयी क्षेत्र की 83 प्रमुख पर्वत चोटियों को पर्वतारोहण अभियानों के लिए अधिसूचित कर दिया गया है। इस फैसले के तहत इन चोटियों पर पर्वतारोहण करने वाले भारतीय पर्वतारोहियों से किसी भी प्रकार का पीक शुल्क, कैंपिंग शुल्क और पर्यावरण शुल्क नहीं लिया जाएगा।
सरकार का यह कदम खास तौर पर देश के युवा पर्वतारोहियों और साहसिक गतिविधियों में रुचि रखने वाले प्रतिभागियों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से उठाया गया है, ताकि उत्तराखंड को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साहसिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जा सके।
🧗♀️ 5700 से 7756 मीटर ऊंची चोटियां शामिल
पर्वतारोहण के लिए खोली गई इन चोटियों की ऊंचाई समुद्रतल से 5700 मीटर से लेकर 7756 मीटर तक है। इनमें हिमालय की कई प्रसिद्ध और चुनौतीपूर्ण चोटियां शामिल हैं, जिनमें कामेट, नंदा देवी (पूर्वी), चौखंबा समूह, त्रिशूल समूह, शिवलिंग, सतोपंथ, चंगाबांग, पंचचूली और नीलकंठ प्रमुख हैं।
पर्वतारोहण से संबंधित गाइडलाइंस के अनुसार, अधिसूचित चोटियों पर अभियान चलाने के लिए भारतीय पर्वतारोहियों को राज्य सरकार को कोई शुल्क अदा नहीं करना होगा।
🌍 विदेशी पर्वतारोहियों को भी मिली राहत
विदेशी पर्वतारोहियों को भी इस निर्णय से बड़ी राहत मिली है। पहले वन विभाग द्वारा उनसे अभियान शुल्क लिया जाता था, जिसे अब समाप्त कर दिया गया है। अब विदेशी पर्वतारोहियों को केवल Indian Mountaineering Foundation द्वारा निर्धारित शुल्क का ही भुगतान करना होगा।
📝 ऑनलाइन सिस्टम से होंगे सभी आवेदन
पर्वतारोहण अभियानों के लिए सभी आवेदन उत्तराखंड माउंटेनियरिंग परमिशन सिस्टम के माध्यम से ऑनलाइन किए जाएंगे। इससे अनुमति प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सरल हो जाएगी।
🌄 रोजगार और पर्यटन को मिलेगा नया आयाम
पर्वतारोहण गतिविधियों के विस्तार से सीमावर्ती और दूरस्थ क्षेत्रों में साहसिक पर्यटन को गति मिलेगी, जिससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। गाइड, पोर्टर, होटल, होमस्टे और परिवहन सेवाओं को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। साथ ही यह पहल पर्यावरण के अनुकूल और संतुलित पर्यटन को भी बढ़ावा देगी।
🗣️ पर्यटन सचिव का बयान
पर्यटन सचिव धीराज गर्ब्याल ने कहा कि,
“हिमालय साहस, प्राकृतिक सौंदर्य, अध्यात्म और सांस्कृतिक विरासत का अनूठा संगम है। 83 पर्वत चोटियों को पर्वतारोहण के लिए खोलने का निर्णय उत्तराखंड के साहसिक पर्यटन को वैश्विक पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाएगा। यह पहल युवाओं को प्रेरित करने के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी मील का पत्थर साबित होगी।”
यह निर्णय उत्तराखंड को साहसिक पर्यटन के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों पर ले जाने की दिशा में एक मजबूत कदम माना जा रहा है।