Sunday, October 25, 2026
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उत्तराखंड में एसआईआर को लेकर स्पष्ट निर्देश: नेपाली मूल के लोगों को वोटर बनने के लिए दिखाना होगा भारतीय नागरिकता प्रमाण

उत्तराखंड में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के तहत नेपाली मूल के लोगों को लेकर चुनाव आयोग ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। राज्य में लंबे समय से निवास कर रहे नेपाल मूल के लोग, भले ही उनके बच्चों का जन्म उत्तराखंड में हुआ हो, मतदाता सूची में तभी शामिल किए जाएंगे जब वे भारतीय नागरिकता का वैध प्रमाण प्रस्तुत कर सकें।

उत्तराखंड के सीमावर्ती जिलों चंपावत, पिथौरागढ़ से लेकर देहरादून तक नेपाल और उत्तराखंड के बीच वर्षों से रोटी-बेटी का गहरा रिश्ता रहा है। बड़ी संख्या में नेपाल की बेटियां विवाह के बाद उत्तराखंड में आकर बस चुकी हैं। इसके अलावा, कई परिवार ऐसे भी हैं जो दशकों से यहां रह रहे हैं। ऐसे में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान यह सवाल लगातार उठ रहा था कि इन लोगों को मतदाता सूची में शामिल करने को लेकर क्या नियम होंगे।

इस विषय पर अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे ने बताया कि भारत में किसी भी बाहरी देश से आए व्यक्ति के मतदाता बनने के लिए भारतीय नागरिकता होना अनिवार्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान मतदाता सूची में जिन लोगों के नाम दर्ज हैं, उनका पंजीकरण भी नागरिकता के आधार पर ही किया गया होगा।

डॉ. जोगदंडे के अनुसार, नेपाल मूल के वे लोग जो अब भारतीय नागरिक बन चुके हैं, लेकिन वर्ष 2003 की मतदाता सूची में शामिल नहीं थे, उन्हें एसआईआर के दौरान इन्म्यूरकेशन (समावेशन) फॉर्म के साथ भारतीय नागरिकता और जन्मतिथि से संबंधित प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने होंगे। हालांकि, ऐसे मामलों में बीएलओ मैपिंग संभव नहीं हो पाएगी, लेकिन उपलब्ध दस्तावेजों के सत्यापन के आधार पर मतदाता बनने का निर्णय लिया जाएगा।

उन्होंने यह भी साफ किया कि जिन लोगों के पास भारतीय नागरिकता का प्रमाण नहीं है, उनका नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं किया जाएगा। इसके अलावा, यदि किसी नेपाली मूल के भारतीय नागरिक को एसआईआर की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट प्रकाशित होने के बाद नोटिस जारी किया जाता है, तो उन्हें भी नागरिकता और जन्मतिथि से जुड़े प्रमाण चुनाव आयोग के समक्ष प्रस्तुत करने होंगे।

चुनाव आयोग ने दोहराया है कि एसआईआर प्रक्रिया पूरी तरह नियमों और पारदर्शिता के तहत की जा रही है, ताकि मतदाता सूची में केवल पात्र भारतीय नागरिकों के नाम ही दर्ज हों।

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