Tuesday, November 3, 2026
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आपदा प्रबंधन में बेटियां भी आगे, युवा आपदा मित्र योजना के तहत 1826 युवाओं को मिला प्रशिक्षण

देहरादून।
आपदा की दृष्टि से संवेदनशील उत्तराखंड में आपदा प्रबंधन को मजबूत करने के लिए युवाओं को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस दिशा में शुरू की गई युवा आपदा मित्र योजना में बेटियां भी बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही हैं और आपदा प्रबंधन के गुर सीखने में वे बेटों से किसी भी तरह पीछे नहीं हैं। योजना के तहत अब तक 1826 युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जिनमें 952 युवक और 874 बेटियां शामिल हैं।

राज्य में भूकंप, भूस्खलन, बादल फटने और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं की संभावनाओं को देखते हुए सरकार और आपदा प्रबंधन विभाग लगातार तैयारी कर रहे हैं। आपदा के समय प्रभावित लोगों को तत्काल सहायता मिल सके और नुकसान को कम किया जा सके, इसी उद्देश्य से सितंबर-2025 से युवा आपदा मित्र योजना की शुरुआत की गई।

4310 युवाओं को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य

योजना के अंतर्गत एनसीसी, एनएसएस, स्काउट-गाइड और ‘मेरा युवा भारत’ से जुड़े कुल 4310 युवाओं को प्रशिक्षण दिया जाना है। इनमें से फिलहाल 1826 युवाओं का प्रशिक्षण पूरा किया जा चुका है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, प्रशिक्षित युवाओं में बेटियों की भागीदारी लगभग बेटों के बराबर है, जो समाज में सकारात्मक बदलाव और महिला सशक्तिकरण को दर्शाता है।

आपदा से निपटने के जरूरी कौशल सिखाए जा रहे

युवा आपदा मित्र योजना के तहत युवाओं को आपदा प्रबंधन से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसमें—

  • आपदा की समझ और जोखिम की पहचान,

  • प्राथमिक उपचार और घायलों को तत्काल सहायता,

  • खोज एवं बचाव कार्य (सर्च एंड रेस्क्यू),

  • राहत शिविरों का संचालन और प्रबंधन,

  • आपदा के बाद समन्वय और त्वरित प्रतिक्रिया
    जैसे विषय शामिल हैं।

एनसीसी कैंप और रेस्क्यू एजेंसियों में प्रशिक्षण

आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह प्रशिक्षण कार्यक्रम एनसीसी के कैंपों के साथ-साथ एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के परिसरों में आयोजित किए जा रहे हैं। इससे युवाओं को पेशेवर आपदा राहत टीमों के साथ कार्य करने का व्यावहारिक अनुभव भी मिल रहा है।

अधिकारियों का कहना है कि आने वाले समय में ये प्रशिक्षित युवा आपदा के दौरान स्थानीय स्तर पर पहली पंक्ति के स्वयंसेवक के रूप में कार्य करेंगे, जिससे आपात स्थितियों में त्वरित मदद पहुंचाकर जान-माल के नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।

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