Monday, November 2, 2026
HTML tutorial
HTML tutorial
Homeउत्तराखण्डउत्तराखण्ड की कानून व्यवस्था चरमराई,इसे गंभीरता से ले सरकार त्रिवेन्द्र रावत

उत्तराखण्ड की कानून व्यवस्था चरमराई,इसे गंभीरता से ले सरकार त्रिवेन्द्र रावत

देहरादून। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने राज्य में लगातार बढ रही आपराधिक गतिविधियों पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में हालात खराब हैं, लेकिन अभी इतने खराब नहीं हैं कि स्थिति नियंत्रण से बाहर हो जाए। जिस तरह की आपराधिक घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, वह निश्चित तौर पर चिंता का विषय है। उन्होंने सरकार से अपील की कि सुरक्षा के मुद्दों पर गंभीरता से विचार किया जाए और प्रभावी कदम उठाए जाएं।
त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि राजधानी देहरादून समेत कई जिलों में हत्या, लूट और डकैती जैसी घटनाओं में वृद्धि देखी जा रही है। ऐसे में सरकार और प्रशासन को सतर्क रहने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि अपराधिक घटनाएं केवल आंकड़ों का विषय नहीं होती, बल्कि इससे आम लोगों के मन में भय और असुरक्षा की भावना पैदा होती है। उत्तराखंड जैसे शांत प्रिय और धार्मिक पर्यटन वाले राज्य में यदि अपराध का ग्राफ बढ़ता है, तो इससे राज्य की छवि पर भी असर पड़ता है। त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि हरिद्वार और देहरादून जैसे शहरों में देश-विदेश से लोग आते हैं। ऐसे में कानून व्यवस्था मजबूत रहना अत्यंत जरूरी है। सरकार को चाहिए कि पुलिस तंत्र को और अधिक सशक्त किया जाए। साथ ही संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई जाए। त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि लगातार हो रही हत्याएं और अन्य आपराधिक वारदातें राज्य के लिए सही संकेत नहीं हैं। उन्होंने इसे सबके लिए बेहद ग्लानि का विषय बताया। उनका कहना है कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन कानून व्यवस्था पर सभी दलों को एकमत होकर सरकार को सहयोग देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सुरक्षा जैसे विषय पर राजनीति से ऊपर उठकर सोचने की आवश्यकता है। कानून व्यवस्था के साथ-साथ त्रिवेंद्र सिंह रावत ने राज्य में डेमोग्राफी चेंज के मुद्दे पर भी बड़ा बयान दिया।
उन्होंने कहा कि जब साल 2000 में राज्य गठन के समय उपलब्ध आंकड़ों का अध्ययन किया गया था, तब यह पाया गया था कि राज्य में अल्पसंख्यक समुदाय की संख्या में तेजी से बढ़ोत्तरी हो रही थी। उन्होंने कहा कि इसमें कोई दो राय नहीं है कि जनसंख्या के आंकड़ों का समय-समय पर विश्लेषण होना चाहिए।

RELATED ARTICLES
- Advertisment -
HTML tutorial
HTML tutorial

Most Popular

Recent Comments