देहरादून: शांत शहर की पहचान पर अपराध का बढ़ता खतरा
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून, जिसे लंबे समय तक शांत और सुरक्षित शहर माना जाता रहा है, अब दूसरे राज्यों के हिस्ट्रीशीटर अपराधियों की पनाहगाह बनती दिखाई दे रही है। हाल ही में कुख्यात सुनील राठी गैंग के शूटर पारस की गिरफ्तारी ने इस चिंता को और गहरा कर दिया है। आरोपी को स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) और देहरादून पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में पकड़ा गया।
पुलिस के अनुसार पारस लंबे समय से दून में रहकर आपराधिक गतिविधियों को संचालित कर रहा था। उसके खिलाफ वर्ष 2019 में डालनवाला थाना क्षेत्र में भी मुकदमा दर्ज किया गया था।
पहले भी सामने आ चुके हैं बाहरी अपराधियों के मामले
देहरादून में बाहरी अपराधियों की मौजूदगी का मामला इससे पहले भी चर्चा में रहा है। झारखंड के कुख्यात गैंगस्टर विक्रम शर्मा ने भी यहां ठिकाना बनाया था, जिसकी बाद में सिल्वर सिटी मॉल में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। लगातार सामने आ रही घटनाओं ने पुलिस और खुफिया एजेंसियों की सतर्कता बढ़ा दी है।
जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार पारस पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुख्यात राठी गैंग से जुड़ा रहा है और पहले मुख्तार अंसारी तथा संजीव जीवा गैंग के संपर्क में भी रह चुका है।
किराये के मकान और सत्यापन की कमी बनी बड़ी वजह
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि देहरादून में तेजी से बढ़ते शहरीकरण, किराये के मकानों की संख्या और बाहरी लोगों की आवाजाही के कारण अपराधी आसानी से अपनी पहचान छिपाकर रह पा रहे हैं। कई मकान मालिक बिना पुलिस सत्यापन के किरायेदार रख लेते हैं, जिससे अपराधियों को सुरक्षित ठिकाना मिल जाता है।
इस समस्या से निपटने के लिए दून पुलिस द्वारा ऑपरेशन क्रैकडाउन चलाया जा रहा है। अभियान के दौरान बिना सत्यापन रह रहे लोगों की पहचान कर सैकड़ों मकान मालिकों पर कार्रवाई करते हुए जुर्माना लगाया गया है।
एसएसपी प्रमेंद्र सिंह डोबाल ने बताया कि बाहरी अपराधियों की गतिविधियों पर खुफिया निगरानी बढ़ा दी गई है और सत्यापन अभियान लगातार जारी रहेगा।
पारस पर दर्ज हैं कई गंभीर मुकदमे
राजपुर थाना क्षेत्र से गिरफ्तार पारस के खिलाफ मुजफ्फरनगर में सात आपराधिक मामले दर्ज हैं, जबकि देहरादून में भी एक मुकदमा दर्ज है। ताजा गिरफ्तारी के बाद उसके खिलाफ कुल नौ मामले दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। उस पर हत्या, धमकी और गैंगस्टर एक्ट जैसे गंभीर आरोप हैं।
‘Made in USA’ ऑटोमेटिक पिस्टल बरामद
पुलिस ने आरोपी पारस और उसके साथी भानु के पास से दो ऑटोमेटिक पिस्टल बरामद की हैं, जिन पर “Made in USA” लिखा हुआ है। आरोपियों के पास हथियारों का कोई लाइसेंस नहीं मिला। विदेशी हथियारों की सप्लाई को लेकर पुलिस जांच कर रही है।
सुनील राठी के नाम पर करते थे वसूली
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे जेल में बंद कुख्यात अपराधी सुनील राठी के संपर्क में थे और उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड में जमीन विवादों को उसके नाम के डर से निपटवाते थे। इसके बदले मोटी रकम वसूली जाती थी। पुलिस को आशंका है कि आरोपी देहरादून में रंगदारी या अन्य गंभीर अपराध की योजना बना रहे थे।
गैंग के डर से सामने नहीं आ रहे पीड़ित
सूत्रों के मुताबिक राठी गैंग के खौफ के कारण कई पीड़ित खुलकर शिकायत दर्ज नहीं करा रहे हैं। बताया जा रहा है कि देहरादून में कई लोग गैंग की वसूली से परेशान हैं, लेकिन डर के कारण पुलिस तक नहीं पहुंच पा रहे।
वीआईपी नंबर की कार से बनाते थे दबदबा
पुलिस ने सहस्रधारा रोड स्थित फॉरेस्ट चुंगी के पास घेराबंदी कर काली स्कॉर्पियो-एन (UP 51 BS 0001) को रोककर आरोपियों को गिरफ्तार किया। वाहन पर वीआईपी नंबर होने के कारण गैंग इलाके में प्रभाव और डर का माहौल बनाने की कोशिश करता था।
पौड़ी जेल में सुनील राठी से करता था मुलाकात
पूछताछ में पारस ने स्वीकार किया कि वह कई बार पौड़ी गढ़वाल जेल में बंद सुनील राठी से मिलने गया था। वर्ष 2012 में हत्या के मामले में जेल जाने के बाद वह पहले संजीव जीवा और बाद में राठी गैंग के संपर्क में आया और उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड में सक्रिय हो गया।
पुलिस ने बढ़ाई निगरानी
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि राजधानी को अपराधियों की शरणस्थली बनने से रोकने के लिए सत्यापन अभियान, निगरानी और संयुक्त ऑपरेशन लगातार जारी रहेंगे। बिना सत्यापन किरायेदार रखने वालों पर भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।