देहरादून।
उत्तराखंड से ट्राउट मछली को दुबई निर्यात करने की राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना को अंतरराष्ट्रीय तनाव के चलते बड़ा झटका लगा है। United States, Israel और Iran के बीच जारी संघर्ष का असर अब प्रदेश की निर्यात योजनाओं पर भी दिखने लगा है। यदि हालात लंबे समय तक ऐसे ही बने रहे तो हर महीने 20 टन ट्राउट मछली विदेश भेजने की योजना प्रभावित हो सकती है।
राज्य में ट्राउट मछली की गुणवत्ता और बढ़ते उत्पादन को देखते हुए सरकार ने इसे अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की तैयारी की थी। हाल ही में देहरादून में विभागीय मंत्री सौरभ बहुगुणा की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में अधिकारियों ने जानकारी दी थी कि आगामी छह महीनों के भीतर दुबई सहित अन्य देशों में ट्राउट मछली का निर्यात शुरू कर दिया जाएगा।
पर्वतीय जिलों से होना था पहला निर्यात
योजना के पहले चरण में धारचूला, मुनस्यारी, डीडीहाट, कनालीछीना और उत्तरकाशी से ट्राउट मछली निर्यात की तैयारी थी। इन क्षेत्रों में ठंडे पानी की उपलब्धता के कारण ट्राउट उत्पादन बेहतर स्तर पर हो रहा है। निर्यात से स्थानीय मछली पालकों को अच्छे दाम मिलने और राज्य में मत्स्य पालन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद थी।
अब यूरोप की ओर रुख
मत्स्य विभाग के सचिव बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने बताया कि दुबई की नजदीकी को देखते हुए वहां निर्यात की योजना बनाई गई थी, लेकिन मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए अब रणनीति में बदलाव किया जा रहा है। विभाग अब यूरोपीय देशों को ट्राउट मछली निर्यात करने की संभावनाएं तलाश रहा है।
मछली पालकों की उम्मीदों को झटका
निर्यात योजना में आई अनिश्चितता से मछली पालकों की उम्मीदों को झटका लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार मिलने से उनकी आय में वृद्धि की संभावना थी, लेकिन युद्ध जैसे हालातों ने फिलहाल इस योजना की रफ्तार धीमी कर दी है।
सरकार का कहना है कि हालात सामान्य होते ही निर्यात योजना को फिर से गति दी जाएगी और वैकल्पिक बाजारों के माध्यम से मछली पालकों को लाभ पहुंचाने का प्रयास जारी रहेगा।