23 हार वाली सीटों पर फोकस, पांच सर्वे के बाद तय होंगे प्रत्याशी
देहरादून। उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अभी से रणनीति तैयार करनी शुरू कर दी है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने स्पष्ट कहा है कि आगामी चुनाव में टिकट वितरण का एकमात्र आधार जीतने की क्षमता होगी। दायित्वधारी और पदाधिकारी अनावश्यक टिकट दावेदारी कर संगठन में विवाद की स्थिति पैदा न करें।
एक विशेष बातचीत में उन्होंने कहा कि फिलहाल सभी कार्यकर्ताओं के लिए “कमल का फूल” ही प्रत्याशी है। पार्टी को जिताना ही सभी का लक्ष्य होना चाहिए। जिन कार्यकर्ताओं को सरकार में दायित्व दिए गए हैं, उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी संगठन को मजबूत करना है, न कि टिकट की होड़ में शामिल होना।
भट्ट ने बताया कि पार्टी ने उन 23 विधानसभा सीटों को चिह्नित किया है, जहां पिछले चुनाव में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा था। इन सीटों पर विशेष रणनीति के तहत काम किया जा रहा है। प्रत्याशी चयन से पहले पांच अलग-अलग सर्वे कराए जाएंगे। सर्वे में जो चेहरा सबसे अधिक जीत दिलाने की क्षमता रखता पाया जाएगा, उसे ही टिकट दिया जाएगा।
उन्होंने दो-टूक कहा कि अनावश्यक दावेदारी से विवाद की स्थिति उत्पन्न करने पर रोक लगनी चाहिए। हालांकि, यदि किसी दायित्वधारी का नाम सर्वे में जीत का सबसे बड़ा आधार बनकर सामने आता है, तो पार्टी उसे प्रत्याशी बनाने से गुरेज नहीं करेगी।
मार्च में कैबिनेट विस्तार के संकेत
प्रदेश में लंबे समय से मंत्रिमंडल के रिक्त पदों को लेकर भी चर्चाएं जारी हैं। इस पर भाजपा अध्यक्ष ने सकारात्मक संकेत दिए। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में मंत्रिमंडल विस्तार एक साथ होने की चर्चा है। संभावना है कि मार्च माह में उत्तराखंड में कैबिनेट विस्तार किया जा सकता है।
प्रदेश मंत्रिमंडल में पांच पद वर्तमान में खाली हैं, जिन्हें भरे जाने की उम्मीद है। साथ ही, दायित्वधारियों की नई सूची भी जल्द ही केंद्रीय नेतृत्व से फाइनल होकर आ सकती है।
कांग्रेस पर साधा निशाना
महेंद्र भट्ट ने विपक्षी कांग्रेस पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस जनसामान्य के मुद्दों से दूर हो चुकी है और भावनात्मक विषयों की राजनीति कर रही है। अंकिता भंडारी मामले का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे पर कई चुनाव लड़ चुकी है, लेकिन जनता ने हर बार भाजपा पर विश्वास जताया है।
चैंपियन परिवार को अनुशासन की सलाह
हाल ही में कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन के आवास पर हुई मुलाकात को लेकर भी उन्होंने स्थिति स्पष्ट की। इसे शिष्टाचार भेंट बताते हुए उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में अनुशासन और भाषा की मर्यादा बनाए रखना आवश्यक है। सोशल मीडिया के दौर में नेताओं को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए और पार्टी के नियमों का पालन करना चाहिए।
“राजनीति में न होते तो संघ के प्रचारक बनते”
एक सवाल के जवाब में भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि यदि वे राजनीति में नहीं होते तो निश्चित रूप से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्णकालिक प्रचारक के रूप में कार्य कर रहे होते।
उन्होंने दोहराया कि भाजपा संगठन आधारित पार्टी है, जहां व्यक्ति से अधिक महत्व विचारधारा और जीत की रणनीति को दिया जाता है।