Wednesday, March 11, 2026
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कैग रिपोर्ट में देहरादून स्मार्ट सिटी परियोजना की पोल खुली, बिना टेंडर 2.93 करोड़ के काम; कई योजनाओं पर खर्च बेकार

देहरादून: राजधानी देहरादून में स्मार्ट सिटी मिशन के तहत चल रही परियोजनाओं में बड़े स्तर पर अनियमितताएं सामने आई हैं। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की ऑडिट रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि कई काम निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना कराए गए, जबकि कई परियोजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद उनका उपयोग तक शुरू नहीं हो पाया।

कैग ने वर्ष 2018 से 2023 के बीच देहरादून स्मार्ट सिटी मिशन के अंतर्गत किए गए कार्यों का ऑडिट किया। रिपोर्ट के अनुसार केंद्र सरकार की स्मार्ट सिटी योजना के तहत देहरादून को वर्ष 2017 में इस परियोजना के लिए चुना गया था। योजना के अंतर्गत शहर में आधुनिक सुविधाओं का विकास और डिजिटल बुनियादी ढांचा तैयार करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन कई परियोजनाओं में लापरवाही और वित्तीय अनियमितताएं सामने आई हैं।

बिना टेंडर के कराए गए 2.93 करोड़ के कार्य

कैग रिपोर्ट के अनुसार देहरादून स्मार्ट सिटी परियोजना में करीब 2.93 करोड़ रुपये के काम बिना टेंडर प्रक्रिया अपनाए कराए गए। इसके अलावा तय समय सीमा में कार्य पूरा न करने के बावजूद कार्यदायी संस्थाओं से लगभग 19 करोड़ रुपये की वसूली नहीं की गई, जिससे सरकारी धन को नुकसान हुआ।

एक हजार करोड़ की परियोजना, 634 करोड़ खर्च

स्मार्ट सिटी परियोजना के लिए एक हजार करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया था। वर्ष 2016 से 2023 के बीच 737 करोड़ रुपये जारी किए गए, जिनमें से 634.11 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी देहरादून स्मार्ट सिटी लिमिटेड (डीएससीएल) को सौंपी गई थी।

स्कूलों में बनी डिजिटल लैब भी शुरू नहीं

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि 5.91 करोड़ रुपये की लागत से देहरादून के तीन सरकारी स्कूलों में कंप्यूटर लैब, इंटरैक्टिव बोर्ड, प्रोजेक्टर, ई-कंटेंट, सीसीटीवी और बायोमीट्रिक मशीनें स्थापित की गईं, लेकिन उन्हें चालू नहीं किया गया। इससे सरकारी धन का उपयोग प्रभावी रूप से नहीं हो सका।

ठोस कचरा प्रबंधन प्रणाली लागू नहीं

दून कमांड एंड कंट्रोल सेंटर परियोजना के तहत ठोस कचरा प्रबंधन की निगरानी के लिए मार्च 2022 में बायोमीट्रिक और सेंसर आधारित प्रणाली विकसित की गई, लेकिन इसे फरवरी 2025 तक लागू नहीं किया गया। इस वजह से करीब 4.55 करोड़ रुपये का खर्च निष्फल साबित हुआ।

इसके अलावा 90 लाख रुपये की लागत से खरीदे गए ई-रिक्शा भी करीब दो साल तक संचालन में नहीं लाए गए।

पर्यावरण सेंसर और मल्टी यूटिलिटी डक्ट का उपयोग नहीं

देहरादून में मौसम और पर्यावरण की जानकारी देने के लिए 2.62 करोड़ रुपये खर्च कर पर्यावरण सेंसर लगाए गए, लेकिन उनका उपयोग नहीं किया गया। इसके अलावा 3.24 करोड़ रुपये की लागत से बनाए गए मल्टी यूटिलिटी डक्ट भी उपयोग में नहीं आए।

कैग ने यह भी पाया कि अधूरी परियोजनाओं के बावजूद परियोजना प्रबंधन सलाहकार को भुगतान कर दिया गया, जिसमें 5.19 करोड़ रुपये की अनियमितता पाई गई।

आठ परियोजनाओं में 38 महीने की देरी

कार्यदायी संस्था को समय पर बाधा रहित कार्य स्थल उपलब्ध न कराए जाने के कारण आठ परियोजनाओं में लगभग 38 महीने की देरी हुई। इसके बावजूद ठेकेदारों पर 1.41 करोड़ रुपये का जुर्माना नहीं लगाया गया, जिससे उन्हें अनुचित लाभ मिला।

रिपोर्ट के अनुसार गलत वित्तीय प्रबंधन के कारण सरकार को 6.20 करोड़ रुपये के ब्याज का नुकसान भी उठाना पड़ा।

स्मार्ट पोल परियोजना भी अधूरी

स्मार्ट सिटी योजना के तहत शहर में 130 स्मार्ट पोल और 100 किलोमीटर ऑप्टिकल फाइबर केबल (ओएफसी) बिछाने की योजना बनाई गई थी। लेकिन वर्ष 2023 तक केवल 27 स्मार्ट पोल लगाए गए और 70 किलोमीटर ओएफसी ही बिछाई जा सकी

ई-बस परियोजना में भी घाटा

शहर में प्रदूषण कम करने के लिए 41.56 करोड़ रुपये की लागत से इलेक्ट्रिक बस परियोजना शुरू की गई थी। वर्ष 2020 में 30 ई-बसों का संचालन शुरू किया गया, लेकिन अपेक्षित राजस्व प्राप्त नहीं हो सका।

डीपीआर के अनुसार वर्ष 2019 से 2026 तक 36.99 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया गया था। मार्च 2023 तक ही 11.26 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है।

कैग रिपोर्ट में सामने आई इन अनियमितताओं ने देहरादून स्मार्ट सिटी परियोजना के क्रियान्वयन और निगरानी व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि परियोजनाओं की समीक्षा और जवाबदेही तय करना आवश्यक है, ताकि भविष्य में सरकारी धन का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।

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