हरिद्वार में भाजपा की नई सियासी रणनीति, दो कैबिनेट मंत्री देंगे संगठन को मजबूती
उत्तराखंड के हरिद्वार जिले में वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में अपेक्षित सफलता न मिलने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने अब यहां अपनी राजनीतिक रणनीति में बदलाव किया है। पार्टी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मंत्रिमंडल विस्तार में जिले के दो वरिष्ठ विधायकों को कैबिनेट मंत्री बनाकर साफ संकेत दिया है कि आने वाले चुनावों में हरिद्वार पर विशेष फोकस रहेगा।
हरिद्वार नगर से पांच बार विधायक रहे मदन कौशिक और रुड़की से लगातार तीसरी बार विधायक चुने गए प्रदीप बत्रा को कैबिनेट मंत्री बनाए जाने को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। भाजपा नेतृत्व का मानना है कि इन दोनों नेताओं के अनुभव और क्षेत्रीय पकड़ से जिले की आठों विधानसभा सीटों पर संगठन को मजबूती मिलेगी।
2022 के चुनाव परिणामों ने बदली रणनीति
वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में हरिद्वार जिले की आठ सीटों में से भाजपा को केवल तीन सीटों पर ही जीत मिल सकी थी। जबकि छह सीटों पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी। इसके अलावा दो सीटें बहुजन समाज पार्टी के खाते में गई थीं और खानपुर सीट से निर्दलीय उम्मीदवार उमेश कुमार विजयी रहे थे।
इसके बाद मंगलौर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भी भाजपा को हार का सामना करना पड़ा और यह सीट कांग्रेस के पास चली गई। सत्ता में रहते हुए उपचुनाव हारना भाजपा के लिए बड़ा झटका माना गया। इसके बाद संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर यह तय किया गया कि हरिद्वार में पार्टी की स्थिति मजबूत करने के लिए विशेष रणनीति अपनाई जाएगी।
अमित शाह की रैली और मंत्रिमंडल विस्तार से मिले संकेत
हरिद्वार में भाजपा की बढ़ती सक्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यहां केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की बड़ी रैली आयोजित की गई। इसके बाद धामी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार में जिले के दो विधायकों को मंत्री बनाकर राजनीतिक संदेश दिया गया।
इसके साथ ही भाजपा ने जिले के सात नेताओं को विभिन्न दर्जाधारी पदों पर जिम्मेदारी देकर संगठन को और मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया है।
मदन कौशिक और प्रदीप बत्रा की भूमिका होगी अहम
मदन कौशिक को हरिद्वार क्षेत्र में भाजपा की रणनीति तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला नेता माना जाता है। उनकी ब्राह्मण समाज और मैदानी क्षेत्रों में अच्छी पकड़ है।
वहीं प्रदीप बत्रा को रुड़की और आसपास के क्षेत्रों में प्रभावशाली नेता माना जाता है। व्यापारी वर्ग और स्थानीय मतदाताओं के बीच उनकी अच्छी पैठ है। भाजपा की योजना है कि इन दोनों नेताओं के जरिए जिले के अलग-अलग सामाजिक और क्षेत्रीय वर्गों को साधा जाए।
सात दर्जाधारियों को दी गई जिम्मेदारी
भाजपा ने हरिद्वार जिले में संगठन को मजबूत करने के लिए सात नेताओं को दर्जाधारी पदों पर जिम्मेदारी दी है। इनमें ओमप्रकाश जमदग्नि, डॉ. जयपाल सिंह चौहान, सुनील सैनी, शोभाराम प्रजापति, श्यामवीर सैनी, देशराज कर्णवाल और अजीत कुमार शामिल हैं।
ये सभी नेता अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय रहे हैं और अब नई जिम्मेदारियों के साथ पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने में भूमिका निभाएंगे।
2017 में सभी सीटें जीती, 2022 में लगा झटका
हरिद्वार जिले में भाजपा का प्रदर्शन पिछले चुनावों में उतार-चढ़ाव भरा रहा है। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को पांच सीटें मिली थीं। इसके बाद 2017 के चुनाव में भाजपा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए जिले की सभी आठ सीटों पर जीत दर्ज की थी।
लेकिन 2022 के चुनाव में पार्टी को बड़ा झटका लगा और उसकी सीटें घटकर तीन रह गईं। यही वजह है कि भाजपा अब 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए हरिद्वार जिले में संगठन को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है।
जातीय और क्षेत्रीय समीकरण साधने की कोशिश
प्रदेश सरकार ने मंत्रियों और दर्जाधारियों के चयन में जातीय और क्षेत्रीय संतुलन बनाने का प्रयास किया है। रुड़की क्षेत्र में श्यामवीर सैनी, शोभाराम प्रजापति और अजीत चौधरी के जरिए रुड़की नगर और मंगलौर जैसी सीटों पर संगठन को मजबूत करने की योजना है।
अनुसूचित समाज से आने वाले देशराज कर्णवाल को राज्य मंत्री का दर्जा देकर झबरेड़ा क्षेत्र में पार्टी की पकड़ मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।
इसके अलावा सैनी समाज के प्रभाव को ध्यान में रखते हुए श्यामवीर सैनी और सुनील सैनी के साथ राज्यसभा सांसद कल्पना सैनी भी इस वर्ग के मतदाताओं को साधने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
भाजपा को उम्मीद है कि मंत्रियों और दर्जाधारियों की यह टीम हरिद्वार जिले में पार्टी को नई ऊर्जा देगी और आने वाले विधानसभा चुनाव में बेहतर परिणाम दिलाने में मदद करेगी।