Saturday, March 28, 2026
Homeउत्तराखंडUttarakhand: गैस सिलिंडर की कमी से महंगा हुआ खाना, होटल-ढाबों में बढ़े...

Uttarakhand: गैस सिलिंडर की कमी से महंगा हुआ खाना, होटल-ढाबों में बढ़े खाने-पीने के दाम

वाणिज्यिक गैस सिलिंडर की किल्लत से लोगों की थाली पर पड़ा असर

उत्तराखंड में वाणिज्यिक गैस सिलिंडर की किल्लत अब आम लोगों की थाली पर सीधा असर डालने लगी है। शहर में होटल, रेस्टोरेंट और रेहड़ी-ढाबा संचालकों को गैस सिलिंडर नहीं मिल पा रहे हैं, जिसके कारण खाने-पीने की वस्तुओं के दाम बढ़ा दिए गए हैं। बढ़ती लागत के कारण दुकानदारों ने अपने मेन्यू कार्ड में बदलाव करना शुरू कर दिया है।

पहले जहां सस्ती थाली करीब 50 रुपये में मिल जाती थी, अब उसकी कीमत बढ़कर 70 रुपये तक पहुंच गई है। इसी तरह पराठों के दाम भी 30-40 रुपये से बढ़कर 60-70 रुपये तक हो गए हैं। इसका असर रोजाना बाहर भोजन करने वाले लोगों की जेब पर पड़ रहा है।

रेस्टोरेंट्स में भी बढ़े खाने के दाम

गैस संकट का असर केवल ढाबों और रेहड़ियों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि शहर के रेस्टोरेंट्स में भी खाने-पीने की वस्तुओं के दाम बढ़ा दिए गए हैं। लालपुल क्षेत्र के एक साउथ इंडियन रेस्टोरेंट में मसाला डोसा 80 रुपये से बढ़कर 100 रुपये, पाव भाजी 80 रुपये से 100 रुपये और पनीर डोसा 110 रुपये से बढ़कर 130 रुपये तक पहुंच गया है।

इसके अलावा चाय की कीमत में भी बढ़ोतरी हुई है। पहले जहां एक कप चाय 10 रुपये में मिलती थी, वहीं अब इसकी कीमत 12 से 15 रुपये प्रति कप हो गई है।

ब्लैक में महंगे मिल रहे गैस सिलिंडर

रेहड़ी और ढाबा संचालकों का कहना है कि बाजार में वाणिज्यिक गैस सिलिंडर पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में कई लोग घरेलू या छोटे 3 से 5 किलो वाले सिलिंडरों का इस्तेमाल करने को मजबूर हैं। वहीं कुछ लोगों को गैस सिलिंडर ब्लैक में खरीदने पड़ रहे हैं।

व्यापारियों के अनुसार सामान्यतः 1700 से 1800 रुपये में मिलने वाला वाणिज्यिक सिलिंडर अब ब्लैक में 4000 रुपये तक में मिल रहा है। इसके अलावा छोटे सिलिंडरों में गैस भरवाने का रेट भी 100-110 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 300 रुपये प्रति किलो से अधिक हो गया है।

गैस खत्म होते ही बंद हो रही दुकानें

गैस संकट के चलते कई छोटे ढाबे और रेहड़ियां बंद होने की कगार पर पहुंच गई हैं। जो संचालक किसी तरह सिलिंडर का इंतजाम कर पा रहे हैं, वही अपनी दुकान चला पा रहे हैं। गैस खत्म होते ही उन्हें दुकान बंद करनी पड़ती है।

लालपुल-कारगी रोड के वेंडिंग जोन में कई ढाबे इसी वजह से बंद पड़े हैं। कुछ संचालक भट्ठी या अन्य वैकल्पिक साधनों का उपयोग कर किसी तरह अपना काम चला रहे हैं, जबकि कुछ लोग सिलिंडर का जुगाड़ कर कारोबार जारी रखने की कोशिश कर रहे हैं।

व्यापारियों का कहना है कि यदि जल्द ही गैस की आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो छोटे कारोबारियों के सामने रोज़गार का संकट और गहरा सकता है।

RELATED ARTICLES

Most Popular

Recent Comments