Monday, November 2, 2026
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उत्तराखंड में पहली बार बद्री तुलसी की व्यावसायिक खेती की तैयारी, धार्मिक व औषधीय महत्व को मिलेगा बढ़ावा

उत्तराखंड में पहली बार बद्रीनाथ धाम में उपयोग होने वाली पवित्र बद्री तुलसी की व्यावसायिक खेती शुरू करने की तैयारी की जा रही है। अब तक यह तुलसी केवल बदरीनाथ धाम के आसपास प्राकृतिक रूप से उगती थी, लेकिन इसकी बढ़ती मांग और संरक्षण की आवश्यकता को देखते हुए इसे संगठित तरीके से उगाने की पहल की गई है।

धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बद्री तुलसी भगवान बदरी विशाल की पूजा में अर्पित की जाती है और श्रद्धालु इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। इसे भगवान विष्णु का स्वरूप माना जाता है, जिससे इसका महत्व और भी बढ़ जाता है।

इस पहल के तहत देहरादून के सेलाकुई स्थित सगंध पौध केंद्र द्वारा बद्री तुलसी की नर्सरी तैयार की जा रही है। पहली बार एरोमा केंद्र में इसके पौधों का उत्पादन शुरू किया गया है, जिन्हें बाद में स्थानीय किसानों को खेती के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। इस वर्ष करीब 50 हजार पौधे वितरित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

बद्री तुलसी केवल धार्मिक ही नहीं बल्कि औषधीय गुणों से भी भरपूर है। इसमें एंटीबायोटिक तत्व पाए जाते हैं, जो मलेरिया, पाचन समस्याओं, सर्दी-खांसी, तनाव कम करने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक हैं। साथ ही यह त्वचा की सेहत के लिए भी लाभकारी मानी जाती है।

सगंध पौध केंद्र ने बद्री तुलसी के पत्तों से अर्क (एक्सट्रैक्ट) तैयार करने की भी योजना बनाई है। वर्तमान में श्रद्धालु कच्ची पत्तियां प्रसाद के रूप में ले जाते हैं, जो कई बार फंगस लगने से खराब हो जाती हैं। ऐसे में अर्क के रूप में इसे लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकेगा और गंगाजल की तरह उपयोग किया जा सकेगा।

सगंध पौध केंद्र के निदेशक नृपेंद्र चौहान के अनुसार, बद्री तुलसी की व्यावसायिक खेती से जहां एक ओर इस दुर्लभ पौधे का संरक्षण होगा, वहीं दूसरी ओर स्थानीय लोगों की आय बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। यह पहल राज्य में औषधीय खेती को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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