देहरादून: उत्तराखंड में आपदा प्रबंधन और चारधाम यात्रा के दौरान रेस्क्यू ऑपरेशन को और प्रभावी बनाने के लिए राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) हाई-टेक तकनीक की ओर बढ़ रहा है। प्रदेश में जल्द ही सैटेलाइट आधारित इंटरनेट सेवा शुरू करने की तैयारी की जा रही है, जिससे दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में भी निर्बाध कनेक्टिविटी मिल सकेगी।
सूत्रों के अनुसार, SDRF मुख्यालय जौलीग्रांट द्वारा सैटेलाइट इंटरनेट सेवा को लेकर प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। यदि इस प्रस्ताव को शासन से मंजूरी मिलती है, तो उत्तराखंड SDRF देश की पहली रेस्क्यू फोर्स बन सकती है, जो सीधे सैटेलाइट इंटरनेट का उपयोग करेगी।
इस पहल के तहत Starlink की सेवाओं को अपनाने की योजना है, जो Elon Musk की कंपनी SpaceX का हिस्सा है। भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा प्रदान करने के लिए कंपनी को आवश्यक लाइसेंस भी मिल चुका है।
चारधाम यात्रा और आपदा में मिलेगी राहत
उत्तराखंड एक पहाड़ी और आपदा संभावित राज्य है, जहां भूस्खलन, बादल फटना और बाढ़ जैसी घटनाएं आम हैं। ऐसे समय में संचार व्यवस्था अक्सर ठप हो जाती है, जिससे राहत एवं बचाव कार्य प्रभावित होते हैं। वर्तमान में SDRF सैटेलाइट फोन का उपयोग करती है, जिससे केवल वॉयस कॉल और सीमित मैसेजिंग की सुविधा मिलती है।
लेकिन सैटेलाइट इंटरनेट लागू होने के बाद SDRF के जवान अपने मोबाइल और अन्य डिवाइस पर हाई-स्पीड इंटरनेट, वीडियो कॉलिंग और डेटा शेयरिंग जैसी आधुनिक सुविधाओं का उपयोग कर सकेंगे। इससे रेस्क्यू ऑपरेशन की गति और सटीकता दोनों में सुधार होगा।
क्या है सैटेलाइट इंटरनेट
सैटेलाइट इंटरनेट एक आधुनिक तकनीक है, जिसमें पृथ्वी की निचली कक्षा (Low Earth Orbit) में स्थापित हजारों छोटे उपग्रहों के माध्यम से इंटरनेट सेवा दी जाती है। यह पारंपरिक फाइबर या केबल नेटवर्क पर निर्भर नहीं होती, बल्कि अंतरिक्ष से सीधे सिग्नल भेजती है।
कैसे करता है काम
इस तकनीक के तहत पृथ्वी से लगभग 500-550 किलोमीटर ऊपर मौजूद सैटेलाइट्स लगातार पृथ्वी का चक्कर लगाते हैं। उपयोगकर्ता के पास एक छोटी डिश एंटीना और वाई-फाई राउटर होता है, जो सिग्नल को सीधे सैटेलाइट तक पहुंचाता है। इसके बाद डेटा ग्राउंड स्टेशन के जरिए इंटरनेट से जुड़ता है और फिर उसी प्रक्रिया से वापस यूजर तक पहुंचता है।
अधिकारियों का बयान
SDRF के सेनानायक अर्पण यदुवंशी के अनुसार, “स्टारलिंक सेवाओं के उपयोग के लिए प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। यदि इसे मंजूरी मिलती है तो दूर-दराज के क्षेत्रों में रेस्क्यू और आपदा प्रबंधन कार्यों में काफी सहायता मिलेगी और SDRF की कार्यक्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।”
इस पहल के लागू होने के बाद उत्तराखंड में आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में एक नई तकनीकी क्रांति देखने को मिल सकती है, जिससे न केवल चारधाम यात्रा सुरक्षित होगी बल्कि आपदा के समय राहत कार्य भी अधिक तेज और प्रभावी बन सकेंगे।