Thursday, May 14, 2026
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देहरादून में बिल्डरों पर रेरा की सख्ती, परियोजना शुरू होने से पहले सार्वजनिक करने होंगे बैंक खातों के विवरण

देहरादून। उत्तराखंड में रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ाने और घर खरीदारों के हितों की सुरक्षा के लिए रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) ने बड़ा फैसला लिया है। अब किसी भी आवासीय परियोजना की शुरुआत से पहले प्रमोटर्स और बिल्डरों को अपने बैंक खातों का विवरण सार्वजनिक करना अनिवार्य होगा। इसके तहत बैंक खाता नंबर राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय समाचार पत्रों में प्रकाशित कराने के साथ-साथ परियोजना स्थल पर लगे बोर्ड, होर्डिंग, ब्रॉशर और विज्ञापनों में भी दर्ज करने होंगे।

यह महत्वपूर्ण निर्णय बृहस्पतिवार को रेरा की 36वीं बैठक में लिया गया, जिसकी अध्यक्षता नव नियुक्त रेरा अध्यक्ष नरेश सी मठपाल ने की। बैठक में खरीदारों के हितों को सुरक्षित करने के लिए कई अन्य अहम प्रस्तावों पर भी सहमति बनी।

खरीदारों से धोखाधड़ी रोकने के लिए उठाया कदम

पिछले कुछ वर्षों में देहरादून समेत प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में कई बड़े बिल्डरों पर खरीदारों के साथ धोखाधड़ी करने के आरोप लगे हैं। कई मामलों में परियोजनाओं में निवेश करने वाले लोगों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा, जबकि कुछ बिल्डर परियोजना अधूरी छोड़कर फरार भी हो गए।

हाल ही में सामने आए पुष्पांजलि बिल्डर और शाश्वत गर्ग से जुड़े मामलों में सबसे बड़ी समस्या उनके बैंक खातों को ट्रेस करने में आई थी। रेरा जांच में यह सामने आया कि प्रमोटर्स ने आधिकारिक खातों के अलावा अन्य खातों में भी लेनदेन किया था। इससे जांच प्रक्रिया लंबी खिंच गई और खरीदारों को राहत मिलने में अनावश्यक देरी हुई।

इन्हीं अनुभवों को देखते हुए रेरा ने अब सख्त नियम लागू करने का निर्णय लिया है ताकि निवेशकों का पैसा सुरक्षित रह सके और किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।

सार्वजनिक होंगे परियोजना से जुड़े सभी बैंक खाते

रेरा अध्यक्ष नरेश सी मठपाल ने बताया कि किसी भी रियल एस्टेट परियोजना को पंजीकरण मिलने के बाद प्रमोटर के लिए यह अनिवार्य होगा कि वह परियोजना से संबंधित बैंक खातों की जानकारी सार्वजनिक करे। इसके लिए एक राष्ट्रीय और एक राज्य स्तरीय समाचार पत्र में सूचना प्रकाशित करनी होगी।

इसके अलावा परियोजना के ब्रॉशर, विज्ञापन, होर्डिंग और साइट पर लगे बोर्ड में भी बैंक खातों का विवरण देना होगा। इससे आम लोगों को केवल अधिकृत खातों में ही पैसा जमा करने की सुविधा मिलेगी और प्रमोटर्स द्वारा अन्य खातों में धनराशि लेने की संभावना समाप्त हो जाएगी।

बिल्डरों को बनाना होगा रिजर्व फंड

बैठक में संभावित धोखाधड़ी और अधूरी परियोजनाओं को ध्यान में रखते हुए एक और महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। अब सभी प्रमोटर्स को एक रिजर्व फंड बनाना होगा। इस फंड में आवंटियों से प्राप्त धनराशि का एक हिस्सा जमा कराया जाएगा।

रेरा के प्रस्ताव के अनुसार परियोजना पूरी होने के बाद भी पांच वर्षों तक प्रमोटर इस फंड से पैसा नहीं निकाल सकेंगे। इसके बाद भी यदि धनराशि निकालनी होगी तो रेरा की अनुमति आवश्यक होगी।

यदि कोई बिल्डर परियोजना अधूरी छोड़ देता है, फरार हो जाता है या निर्माण कार्य में गंभीर कमी पाई जाती है, तो इसी फंड का उपयोग कर खरीदारों को राहत दी जाएगी और परियोजना से जुड़ी कमियों को दूर कराया जाएगा। हालांकि, इस फंड में जमा होने वाली राशि का प्रतिशत बाद में निर्धारित किया जाएगा।

परियोजना विस्तार और संशोधन की जानकारी भी होगी सार्वजनिक

रेरा ने परियोजनाओं में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए अवधि विस्तार और पंजीकरण संशोधन संबंधी जानकारी को भी सार्वजनिक करना अनिवार्य कर दिया है। अब यदि कोई प्रमोटर परियोजना की समय सीमा बढ़ाता है या पंजीकरण में बदलाव करता है, तो उसकी सूचना भी समाचार पत्रों में प्रकाशित करनी होगी।

इसके अलावा यदि कोई पुरानी परियोजना निरस्त कर नई परियोजना के रूप में पंजीकरण कराने का आवेदन करता है, तो उससे पहले आवंटियों की आपत्तियों को भी सार्वजनिक किया जाएगा। प्राप्त आपत्तियों का समयबद्ध निस्तारण करना अनिवार्य होगा। ऐसा न करने पर संबंधित प्रमोटर के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

पारदर्शी रियल एस्टेट व्यवस्था बनाने पर जोर

रेरा अध्यक्ष नरेश सी मठपाल ने कहा कि राज्य में रेरा को और अधिक मजबूत बनाया जाएगा ताकि उत्तराखंड में पारदर्शी और स्वस्थ रियल एस्टेट इकोसिस्टम विकसित हो सके। उन्होंने कहा कि खरीदारों के हितों की सुरक्षा रेरा की प्राथमिकता है और रियल एस्टेट कारोबार में अनियमितता फैलाने वाले तत्वों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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