Tuesday, November 3, 2026
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हरीश रावत का इस्तीफा दांव सहानुभूति बटोरने के लिए चुनावी स्टंटः भाजपा

देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत के पूर्व विशेष कार्याधिकारी और निजी सचिव चंदन सिंह जीना के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय  की छापेमारी के बाद रावत ने कांग्रेस प्रदेश कार्यकारिणी और कांग्रेस कार्यसमिति के स्थायी आमंत्रित सदस्य पद से इस्तीफे की घोषणा कर दी। ईडी की इस कार्रवाई में ओएमआर शीट्स में हेरफेर से जुड़े धन शोधन मामले में 32 लाख रुपये से अधिक नकदी, 200 ग्राम सोना और रोलेक्स-राडो जैसी 12 लक्जरी घड़ियां बरामद हुई हैं।

इसके बाद हरीश रावत ने सोशल मीडिया पर इस्तीफे की पेशकश की। जिस पर भारतीय जनता पार्टी ने दोहरा हमला बोला है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट और वरिष्ठ नेता व प्रदेश प्रवक्ता विनोद चमोली ने हरीश रावत के इस फैसले को केवल चुनावी स्टंट और पार्टी के भीतर दबाव बनाने का पैंतरा करार दिया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने हरीश रावत के इस्तीफे के ऐलान पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि हरीश रावत कांग्रेस के बहुत वरिष्ठ नेता हैं। वे अक्सर कांग्रेस के भीतर अपनी स्थिति मजबूत करने व जनता की सहानुभूति बटोरने के लिए इस प्रकार के हथकंडे अपनाते रहते हैं। हम तो उस दिन की प्रतीक्षा कर रहे हैं जब हरीश रावत जी कांग्रेस को अलविदा कहेंगे। चुनाव के समय ईडी की कार्रवाई के आरोपों पर जवाब देते हुए महेंद्र भट्ट ने कहा कि ईडी एक स्वायत्त जांच एजेंसी है, जिसका काम निरंतर चलता रहता है। यूकेएसएसएससी  भर्ती प्रक्रिया में शुरू से ही अनियमितताएं हुई हैं, यदि जांच में किसी के यहां से अवैध संपत्ति और सबूत निकलते हैं, तो कांग्रेस को इसे सकारात्मक रूप से लेना चाहिए। कांग्रेस नेताओं में यह साहस होना चाहिए कि जो गलत करेगा उसे दंडित किया जाएगा। चुनाव तो अभी बहुत दूर (फरवरी में) हैं, इसे चुनावी रंजिश से जोड़कर देखना बिल्कुल गलत है।भाजपा प्रदेश प्रवक्ता विनोद चमोली ने भी हरीश रावत के रुख पर कड़ा हमला बोला। विनोद चमोली ने कहा कि इस्तीफे की पेशकश नहीं की जाती, जिसे वास्तव में नैतिक आधार पर त्यागपत्र देना होता है, वह दे देता है। केवल माहौल बनाने और दबाव की राजनीति करने के लिए इस्तीफे की पेशकश करना उनका पुराना तरीका है। विनोद चमोली ने कहा कि कांग्रेस के भीतर भी हरीश रावत अब अलग-थलग पड़ चुके हैं। पार्टी के अंदर नया नेतृत्व उभर रहा है। यशपाल आर्य जैसे नेताओं ने एक परिवार-एक टिकट की पैरवी की। जिससे हरीश रावत अपने ही चक्रव्यूह में घिर गए हैं। अपने परिवार के लिए टिकटों की सेटिंग न होने से बौखलाकर वे इस्तीफे का नाटक कर रहे हैं। ओएसडी मुख्यमंत्री का सीधा प्रतिनिधि होता है। उनके परिसरों से अकूत संपत्ति का मिलना उस दौर के शासनकाल में व्याप्त भ्रष्टाचार की पोल खोलता है।

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