Saturday, October 24, 2026
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अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर उत्तराखंड में सियासी उबाल, कांग्रेस का प्रदेशव्यापी प्रदर्शन, यमकेश्वर विधायक के आवास का घेराव

उत्तराखंड में बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर एक बार फिर राजनीति गरमा गई है। मामले में न्याय की मांग, कथित वीआईपी का नाम सार्वजनिक करने और सीबीआई जांच की मांग को लेकर कांग्रेस ने प्रदेशभर में प्रदर्शन किया। अलग-अलग जिलों में कांग्रेस और उसके अनुषंगी संगठनों ने सरकार के खिलाफ विरोध जताते हुए पुतला दहन और घेराव किया।

ऋषिकेश में महिला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला के नेतृत्व में महिला कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने यमकेश्वर विधायक रेणु बिष्ट के आवास का घेराव किया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की और नुक्कड़ नाटक के माध्यम से सरकार पर सवाल उठाए। प्रदर्शन के दौरान किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात रहा।

महिला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला ने कहा कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में शामिल कथित वीआईपी के नाम को लेकर प्रदेश सरकार की चुप्पी संदेह पैदा करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार किसी प्रभावशाली व्यक्ति को बचाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की सीबीआई से निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों को सख्त सजा मिले। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भाजपा सरकार का पुतला भी फूंका।

वहीं, कर्णप्रयाग में भाजपा कार्यकर्ताओं ने इस मामले को लेकर कांग्रेस पर पलटवार करते हुए प्रदर्शन किया और कांग्रेस सरकार का पुतला दहन किया। भाजपा नेताओं ने कहा कि कांग्रेस बिना सबूतों के अंकिता भंडारी के नाम पर राजनीति कर रही है। उन्होंने मांग की कि यदि कांग्रेस के पास कोई ठोस सबूत हैं तो उन्हें सार्वजनिक किया जाए और दिवंगत अंकिता के नाम पर राजनीति न की जाए।

उधर, देहरादून में एनएसयूआई छात्र संगठन ने अंकिता भंडारी हत्याकांड और एंजेल चकमा की हत्या में न्याय की मांग को लेकर डीएम कार्यालय पर प्रदर्शन किया। साथ ही प्रदेश में निजी विश्वविद्यालयों द्वारा किए जा रहे शिक्षा के बाजारीकरण के विरोध में भी प्रदर्शन किया गया। देहरादून के यमुना कॉलोनी चौक पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भाजपा सरकार का पुतला फूंका।

अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर जारी विरोध-प्रदर्शनों से साफ है कि यह मुद्दा एक बार फिर उत्तराखंड की राजनीति के केंद्र में आ गया है और आने वाले दिनों में इस पर सियासी बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।

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