Monday, November 2, 2026
HTML tutorial
HTML tutorial
Homeउत्तराखंडअंकिता भंडारी हत्याकांड: वीआईपी कनेक्शन की जांच अब सीबीआई के हवाले, आईजी...

अंकिता भंडारी हत्याकांड: वीआईपी कनेक्शन की जांच अब सीबीआई के हवाले, आईजी गढ़वाल बोले– हर शंका का होगा समाधान

देहरादून।
उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में लंबे समय से उठ रहे वीआईपी कनेक्शन और साक्ष्य मिटाने के आरोपों की जांच अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) करेगी। राज्य सरकार ने इस संबंध में प्रकरण से जुड़ी पूरी फाइल सीबीआई को भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। गढ़वाल परिक्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) राजीव स्वरूप ने शनिवार को प्रेस वार्ता में यह जानकारी देते हुए कहा कि सीबीआई जांच से मामले से जुड़े सभी संशयों का समाधान होगा।

आईजी राजीव स्वरूप ने स्पष्ट किया कि अंकिता भंडारी हत्याकांड की जांच राज्य पुलिस ने शुरू से ही पूरी गहनता, निष्पक्षता और जिम्मेदारी के साथ की थी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए वरिष्ठ महिला आईपीएस अधिकारी के नेतृत्व में विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया गया था। एसआईटी ने ठोस साक्ष्य जुटाते हुए तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा और प्रभावी विवेचना व पैरवी के चलते उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। उन्होंने बताया कि आरोपियों को अब तक एक दिन के लिए भी जमानत नहीं मिली है।

वीआईपी विवाद की स्वतंत्र जांच

आईजी ने बताया कि अंकिता हत्याकांड में कथित वीआईपी की संलिप्तता और साक्ष्य छिपाने या नष्ट करने के आरोपों को लेकर उठे सवालों की निष्पक्ष जांच के लिए अब केंद्रीय एजेंसी को जिम्मेदारी सौंपी जा रही है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर शासन स्तर से संबंधित फाइल सीबीआई को भेजी जा रही है। सरकार यह स्पष्ट संदेश देना चाहती है कि इस मामले में किसी भी स्तर पर कुछ भी छिपाया नहीं जाएगा।

उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने स्वयं अंकिता के माता-पिता से बातचीत कर उन्हें भरोसा दिलाया है कि न्याय सुनिश्चित करने के लिए हर जरूरी कदम उठाया जाएगा। सीबीआई जांच के बाद यदि कोई नया तथ्य या साक्ष्य सामने आता है, तो उस पर भी विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।

डॉ. अनिल प्रकाश जोशी की तहरीर पर एफआईआर

पुलिस महानिरीक्षक ने बताया कि पद्मभूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी की तहरीर पर देहरादून के बसंत विहार थाने में शुक्रवार देर रात प्राथमिकी दर्ज की गई है। इस एफआईआर में मुख्य रूप से दो बिंदुओं पर जांच केंद्रित की गई है—पहला, उन अज्ञात व्यक्ति या व्यक्तियों की पहचान और भूमिका की जांच, जिन्हें वीआईपी कहा जा रहा है; दूसरा, हत्याकांड से जुड़े साक्ष्यों को छिपाने या नष्ट करने के आरोप।

डॉ. जोशी ने शिकायत में कहा है कि भले ही अंकिता हत्याकांड में दोषियों को सजा मिल चुकी है, लेकिन सोशल मीडिया और अन्य मंचों पर लगातार यह आरोप लगाए जा रहे हैं कि मामले में कुछ महत्वपूर्ण साक्ष्य छिपाए या नष्ट किए गए। ऐसे में कथित वीआईपी से जुड़े तथ्यों को उजागर करने के लिए एक स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

सोशल मीडिया अफवाहों से सावधान रहने की अपील

आईजी राजीव स्वरूप ने जनता से अपील की कि वे सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों पर ध्यान न दें। यदि किसी व्यक्ति के पास इस मामले से जुड़ा कोई भी ठोस या गुप्त साक्ष्य है, तो वह सीधे जांच एजेंसी को सौंपे। उन्होंने कहा कि सीबीआई जांच के बाद इस संवेदनशील मामले से जुड़े सभी सवालों पर स्पष्टता आएगी और न्याय प्रक्रिया और अधिक मजबूत होगी।

RELATED ARTICLES
- Advertisment -
HTML tutorial
HTML tutorial

Most Popular

Recent Comments