प्रदूषण से परेशान हैं तो बैक्टीरिया आपकी मदद कर सकता है। इस खास किस्म के रंग बिरंगे बैक्टीरिया को आप अपने घर में जगह देंगे तो यह बदले में आपको भरपूर ऑक्सीजन देगा। यह बैक्टीरिया काई के रूप में पाया जाता है। इस नायाब तरीके की खोज की है हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल (केंद्रीय) विश्वविद्यालय ने। विश्वविद्यालय के माइक्रो बायोलॉजी विभाग ने घर में बैक्टीरिया की पैदावार के लिए एल्गफ्लो संयंत्र बनाया है। इसे आस्ट्रेलिया सरकार से पेटेंट भी मिल गया है।
इस संयंत्र की मदद से घर और दफ्तर के अंदर ब्लू-ग्रीन बैक्टीरिया को पनपाया जा सकता है। इससे बंद कमरों में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ेगी और कार्बन डाईऑक्साइड की मात्रा कम होगी। यह बैक्टीरिया पेड़-पौधों की तरह कार्बन डाईऑक्साइड को सोखता है और ऑक्सीजन छोड़ता है। इसके लिए पौधों को धूप की जरूरत होती है लेकिन यह बैक्टीरिया कृत्रिम प्रकाश में भी प्रकाश संश्लेषण करता है। विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. राहुल कंवर सिंह और शोध छात्रा प्रीति सिंह व राहुल नेगी की टीम ने बैक्टीरिया को पनपाने का आसान और सस्ता तरीका निकाला। उन्होंने बताया कि लोग घरों या ऑफिस के अंदर गमलों में ऐसा पौधा लगाना चाहते हैं जो शोभा बढ़़ाने के साथ ही ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाए। कई बार कमरों के अंदर धूप नहीं आ पाती। ऐसे स्थानों के लिए ब्लू-ग्रीन बैक्टीरिया बेहतर विकल्प है। यह हवा में कार्बन डाईऑक्साइड की मात्रा कम कर और ऑक्सीजन बढ़ा कर घर के अंदर की हवा को शुद्ध करने में सहायता करता है।
ऐसे काम करता है एल्गफ्लो
एल्गफ्लो संयंत्र के लिए एक प्लास्टिक कंटेनर का उपयोग किया गया है। बैक्टीरिया की पैदावार बढ़ाने के लिए संयंत्र में रसोईघर या वाटर प्यूरिफायर से निकले पानी का उपयोग किया जाता है। इस पानी में बैक्टीरिया डाला जाता है। बैक्टीरिया की तेजी से बढ़त के लिए कुछ पोषक तत्वों का प्रयोग किया गया है। इसके अतिरिक्त संयंत्र में कृत्रिम प्रकाश की उपलब्धता के लिए रिचार्ज होने वाली बैटरी और एलईडी स्ट्रिप लगाई गई है। जीवन चक्र पूरा होने के बाद बैक्टीरिया के बायोमास (जैविक अवशेष) को जैविक खाद की तरह प्रयोग किया जा सकता है। कंटेनर के पानी को लगभग 20 दिनों में एक बार बदलने की आवश्यकता होती है। इसके बाद दोबारा इसमें बैक्टीरिया पनपने लगते हैं। यह बैक्टीरिया पूरे दिन में कितना ऑक्सीजन छोड़ता है अभी इस पर शोध चल रहा है। इस बैक्टीरिया को गढ़वाल विवि के माइक्रो बायोलॉजी विभाग से हासिल किया जा सकता है।
क्या है ब्लू-ग्रीन बैक्टीरिया
ब्लू-ग्रीन बैक्टीरिया को गुणों की वजह से ग्रीन-ब्लू एल्गी (शैवाल या काई) भी कहा जाता है। यह शैवाल और बैक्टीरिया के बीच की कड़ी है। इसमें ब्लू-ग्रीन पिगमेंट (रंगद्रव्य) होता है। इसलिए यह नीले-हरे दिखाई देते हैं। यह सूक्ष्म शैवाल यानी काई की श्रेणी में आते हैं।