Thursday, April 2, 2026
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जनगणना में लापरवाही पर तीन साल तक की जेल, सहयोग न करने वालों पर जुर्माना: सरकार ने जारी किए सख्त निर्देश

देशभर में शुरू होने वाली जनगणना को लेकर केंद्र सरकार ने सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। भारत के महापंजीयक की ओर से उत्तराखंड समेत सभी राज्यों के जनगणना निदेशालयों को जनगणना अधिनियम 1948 के प्रावधानों के संबंध में सर्कुलर जारी किया गया है। इसमें स्पष्ट किया गया है कि जनगणना कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही, नियमों का उल्लंघन या गलत जानकारी देने पर संबंधित अधिकारी-कर्मचारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

साथ ही आम नागरिकों को भी जनगणना प्रक्रिया में सहयोग करना अनिवार्य होगा। यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर गलत जानकारी देता है या अधिकारियों के सवालों का जवाब देने से इनकार करता है, तो उस पर भी जुर्माना लगाया जा सकता है।


अप्रैल से शुरू होगा जनगणना का पहला चरण

सरकारी निर्देशों के अनुसार जनगणना का पहला चरण इसी महीने शुरू किया जाएगा। इस चरण के तहत 10 अप्रैल से पोर्टल se.census.gov.in पर मकान स्व-गणना (Self Enumeration) की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इसके बाद 25 अप्रैल से 24 मई तक मकान सूचीकरण और गणना का कार्य किया जाएगा।

इस दौरान अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय की गई है, ताकि जनगणना का कार्य पारदर्शी और सटीक तरीके से पूरा हो सके।


अधिकारी-कर्मचारियों पर लागू होंगे कड़े प्रावधान

जनगणना अधिनियम 1948 की धारा 11 के तहत जनगणना कार्य में लगे अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए सख्त नियम निर्धारित किए गए हैं।

  • यदि कोई अधिकारी अपने कर्तव्यों का पालन करने से इनकार करता है या किसी अन्य व्यक्ति को काम करने से रोकता है, तो उसे तीन साल तक का कारावास और 1,000 रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।
  • यदि कोई कर्मचारी अपने कार्य में लापरवाही बरतता है या उचित तत्परता नहीं दिखाता है, तो वह भी दंड का भागी होगा।
  • जानबूझकर गलत प्रश्न पूछना, गलत डेटा तैयार करना या बिना अनुमति जनगणना से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करना भी अपराध माना जाएगा।
  • इसके अलावा जनगणना से जुड़े दस्तावेजों को छिपाने, नष्ट करने या उनके परिणामों में हेराफेरी करने पर भी सख्त सजा का प्रावधान है।

आम नागरिकों के लिए भी बनाए गए नियम

जनगणना अधिनियम 1948 की धारा 8, 11 और 15 के तहत आम नागरिकों को भी जनगणना प्रक्रिया में सहयोग करना अनिवार्य किया गया है।

यदि कोई व्यक्ति जनगणना अधिकारी द्वारा पूछे गए अनिवार्य प्रश्नों का जानबूझकर गलत उत्तर देता है या उत्तर देने से इनकार करता है, तो उस पर 1,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

इसके अलावा जनगणना के उद्देश्य से किसी घर या परिसर में अधिकारी के प्रवेश को रोकना, मकानों पर लगाए गए जनगणना के नंबर या चिन्हों को मिटाना या बदलना भी दंडनीय अपराध माना जाएगा।

यदि किसी मकान के अधिभोगी या संस्थान के प्रबंधक को जनगणना फॉर्म भरने के लिए कहा जाता है और वह बिना किसी वैध कारण के ऐसा नहीं करता या गलत जानकारी देता है, तो उसे भी जुर्माना भरना पड़ सकता है।


ईमानदारी से सहयोग करने की अपील

जनगणना निदेशक इवा आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि जनगणना अधिनियम 1948 के तहत अधिकारियों, कर्मचारियों और आम जनता सभी के लिए स्पष्ट नियम तय किए गए हैं। उन्होंने कहा कि इन प्रावधानों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जनगणना का कार्य पूरी ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ संपन्न हो।

उन्होंने लोगों से अपील की कि वे जनगणना अधिकारियों को सही जानकारी दें और इस राष्ट्रीय अभियान को सफल बनाने में अपना सहयोग करें।

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