देहरादून। ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में संपन्न हुए बजट सत्र के बाद कांग्रेस ने देहरादून में प्रेसवार्ता कर राज्य सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए। पार्टी नेताओं ने कहा कि बजट सत्र के दौरान संसदीय परंपराओं का पालन नहीं किया गया और महत्वपूर्ण जनसरोकार के मुद्दों पर चर्चा से बचने की कोशिश की गई।
प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा कि गैरसैंण में आयोजित बजट सत्र के दौरान लोकतांत्रिक मूल्यों का हनन हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्यपाल के अभिभाषण वाले दिन ही बजट पेश करना स्थापित संसदीय परंपराओं के विपरीत है। सामान्यतः पहले राज्यपाल का अभिभाषण होता है और उसके बाद बजट पेश किया जाता है, लेकिन इस बार सरकार ने इस परंपरा का पालन नहीं किया।
नेता प्रतिपक्ष ने यह भी कहा कि बजट पर चर्चा के दौरान सदन में मंत्रियों और सत्तारूढ़ दल के कई विधायकों की उपस्थिति बेहद कम रही। उन्होंने इसे जनता के प्रति सरकार की जिम्मेदारी से दूरी बताते हुए कहा कि जब राज्य के सबसे महत्वपूर्ण वित्तीय दस्तावेज पर चर्चा हो रही थी, तब सत्ता पक्ष के कई प्रतिनिधि सदन में मौजूद नहीं थे।
कांग्रेस ने सरकार पर राज्य की कीमती जमीनों को निजी हाथों में देने की तैयारी का भी आरोप लगाया। विपक्ष के अनुसार विकासनगर, मसूरी और यमुना कॉलोनी में सरकारी तथा सिंचाई विभाग की महत्वपूर्ण जमीनों को निजी संस्थाओं को सौंपने की योजना बनाई जा रही है, जो राज्यहित के खिलाफ है।
इसके अलावा कांग्रेस नेताओं ने राज्य के बजट और कर्ज को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि सरकार ने 1.11 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया है, जबकि राज्य पर कर्ज का बोझ बढ़कर करीब 1.08 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। ऐसे में भविष्य में राज्य की आर्थिक स्थिति पर इसका प्रभाव पड़ सकता है।
प्रेसवार्ता में कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार ने बेरोजगारी, महंगाई और पलायन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर सदन में चर्चा से बचने का प्रयास किया और केवल अपने एजेंडे को आगे बढ़ाया। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यदि सरकार इन सवालों का जवाब नहीं देती है तो पार्टी इन मुद्दों को जनता के बीच ले जाकर आंदोलन करेगी।