उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में तीन नाबालिग बहनों की आत्महत्या की दर्दनाक घटना के बाद देहरादून जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। बच्चों और किशोरों में बढ़ती ऑनलाइन गेमिंग की लत को गंभीर सामाजिक खतरा मानते हुए जिला प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाए हैं। इसी क्रम में जिलाधिकारी सविन बंसल ने ऑनलाइन गेमिंग को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि हाल के दिनों में बच्चों में मोबाइल, इंटरनेट और ऑनलाइन गेम्स के अत्यधिक उपयोग से मानसिक और सामाजिक समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। इसे देखते हुए जिले के सभी सरकारी और निजी स्कूलों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की गई है, जिसमें संतुलित डिजिटल उपयोग और बच्चों के व्यवहार पर निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।
स्कूलों में जारी हुई एडवाइजरी
प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, स्कूलों को छात्रों के डिजिटल व्यवहार पर नजर रखने के साथ-साथ नियमित जागरूकता कार्यक्रम और काउंसलिंग सत्र आयोजित करने होंगे। शिक्षकों को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि वे बच्चों में ऑनलाइन गेमिंग की लत के शुरुआती संकेतों को पहचानें और समय रहते अभिभावकों को इसकी जानकारी दें।
अभिभावकों को जागरूक करने पर जोर
डीएम सविन बंसल ने कहा कि केवल स्कूल ही नहीं, बल्कि अभिभावकों की भूमिका भी बेहद अहम है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों के स्क्रीन टाइम, मोबाइल उपयोग और ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखें। बच्चों से संवाद बनाए रखना और उन्हें सही डिजिटल व्यवहार के लिए प्रेरित करना आज की सबसे बड़ी जरूरत है।
गाजियाबाद की घटना ने बढ़ाई चिंता
गौरतलब है कि 4 फरवरी को गाजियाबाद की एक रिहायशी इमारत की नौवीं मंजिल से कूदकर तीन सगी बहनों ने आत्महत्या कर ली थी। तीनों नाबालिग थीं, जिनकी उम्र 12, 14 और 16 वर्ष बताई जा रही है। प्रारंभिक जांच रिपोर्ट्स के मुताबिक, वे एक कोरियन ऑनलाइन टास्क-बेस्ड गेमिंग ऐप की लत का शिकार थीं।
पुलिस के अनुसार, घटनास्थल से एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ, जिसमें लिखा था— “मम्मी, पापा, सॉरी।” बताया जा रहा है कि माता-पिता उनकी ऑनलाइन गेमिंग की आदतों को लेकर नाराज रहते थे और उन्हें रोकने की कोशिश कर रहे थे।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
ऑनलाइन गेमिंग से जुड़ी आत्महत्या का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी देश के कई राज्यों से बच्चों और किशोरों द्वारा आत्मघाती कदम उठाने की खबरें सामने आती रही हैं। इन्हीं घटनाओं से सबक लेते हुए देहरादून प्रशासन ने समय रहते सख्त रुख अपनाया है।
प्रशासन का कहना है कि यदि स्कूल, अभिभावक और समाज मिलकर बच्चों के डिजिटल जीवन पर ध्यान दें, तो ऑनलाइन गेमिंग की लत से होने वाले गंभीर परिणामों को रोका जा सकता है।