देहरादून।
राजधानी देहरादून के बसंत विहार क्षेत्र में सामने आए हिट एंड रन मामले ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि इस प्रकरण में पुलिस ने पीड़ित परिवार की मदद करने के बजाय आरोपी का पक्ष लिया और घायल बुजुर्ग के परिजनों पर समझौते का दबाव बनाया। न्याय के लिए भटकते रहे पीड़ित परिवार को आखिरकार 38 दिन बाद एफआईआर दर्ज होने पर राहत मिली।
मामला 73 वर्षीय राजेश चड्ढा से जुड़ा है, जो तीन दिसंबर 2025 की सुबह दूध लेने के लिए घर से निकले थे। जीएमएस रोड स्थित शक्ति एन्क्लेव के पास एक बाइक सवार युवक ने गलत दिशा में लापरवाही से वाहन चलाते हुए उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर के बाद बुजुर्ग सड़क पर गंभीर रूप से घायल हो गए, जबकि आरोपी मौके से फरार हो गया।
दुर्घटना में बुजुर्ग के चेहरे पर गंभीर चोटें आईं, जिनमें सात टांके लगे, वहीं घुटने की हड्डी टूटने के कारण उन्हें बड़े ऑपरेशन से गुजरना पड़ा। घायल की बेटी अनुष्का ने बताया कि घटना के बाद वह लगातार चौकी और थाने के चक्कर काटती रहीं, लेकिन पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज करने में टालमटोल की।
आरोप है कि पुलिस ने आरोपी के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय पीड़ित परिवार पर समझौते का दबाव बनाया। न्याय न मिलता देख अनुष्का ने खुद घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालकर आरोपी का नाम और पता जुटाया। इसके बावजूद पुलिस ने तत्काल एफआईआर दर्ज नहीं की। उल्टा, पीड़ित परिवार का पता और मोबाइल नंबर आरोपी को दे दिए गए, ताकि वह समझौते के लिए दबाव बना सके।
जब समझौते की कोशिशें विफल रहीं और मामला तूल पकड़ने लगा, तब घटना के 38 दिन बाद जाकर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की। इस देरी को लेकर पुलिस की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।
वहीं, इस मामले पर थानाध्यक्ष अशोक राठौड़ का कहना है कि दोनों पक्षों के बीच समझौते की बातचीत चल रही थी, इसी कारण एफआईआर दर्ज करने में देरी हुई। हालांकि, पीड़ित परिवार का कहना है कि कानून के तहत समय पर कार्रवाई न होना पुलिस की संवेदनहीनता और लापरवाही को दर्शाता है।