Saturday, October 24, 2026
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EU Carbon Tax: ईयू के कार्बन टैक्स पर कांग्रेस की आपत्ति, भारतीय निर्यातकों पर बढ़ेगी लागत

यूरोपीय संघ (EU) द्वारा लागू किए जा रहे कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) को लेकर कांग्रेस ने कड़ी आपत्ति जताई है। पार्टी का कहना है कि ईयू का यह कार्बन टैक्स भारतीय निर्यातकों के लिए नुकसानदायक साबित होगा और इससे खासतौर पर इस्पात व एल्युमिनियम उद्योग पर भारी आर्थिक बोझ पड़ेगा। कांग्रेस ने इसे “अस्वीकार्य गैर-शुल्कीय बाधा” करार देते हुए मांग की है कि प्रस्तावित भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (FTA) में इस मुद्दे को प्राथमिकता से शामिल किया जाए।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि लंबे समय से लंबित भारत-ईयू एफटीए को इस महीने अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है। ऐसे में ईयू का कार्बन टैक्स भारतीय उद्योगों के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। उन्होंने बताया कि गुरुवार से भारतीय स्टील और एल्युमिनियम निर्यातकों को यूरोपीय संघ के 27 देशों में निर्यात पर कार्बन टैक्स का सामना करना पड़ेगा।

जयराम रमेश के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का ईयू को स्टील और एल्युमिनियम निर्यात औसतन 5.8 अरब डॉलर रहा, जो पिछले वर्ष के 7 अरब डॉलर से कम है। यह गिरावट सीबीएएम लागू होने की तैयारियों के चलते पहले ही शुरू हो चुकी थी। उन्होंने चेतावनी दी कि नए कर प्रावधानों से भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता और कमजोर हो सकती है।

कांग्रेस नेता ने ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के अनुमान का हवाला देते हुए कहा कि कई भारतीय निर्यातकों को अपने उत्पादों की कीमतों में 15 से 22 प्रतिशत तक की कटौती करनी पड़ सकती है, ताकि यूरोपीय आयातक उसी मार्जिन से कार्बन टैक्स का भुगतान कर सकें। इसके अलावा, कार्बन उत्सर्जन की विस्तृत रिपोर्टिंग और जटिल दस्तावेजी प्रक्रियाएं भी भारतीय निर्यातकों पर अतिरिक्त बोझ डालेंगी।

1 जनवरी 2026 से लागू हुआ सीबीएएम

यूरोपीय संघ का कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) 1 जनवरी 2026 से कुछ प्रमुख धातुओं पर लागू हो गया है। इससे भारत के एल्युमिनियम और इस्पात निर्यातकों को बड़ा झटका लगने की आशंका है। जीटीआरआई के मुताबिक, प्रतिस्पर्धा में बने रहने के लिए भारतीय निर्यातकों को कीमतों में 15 से 22 प्रतिशत तक की कटौती करनी पड़ सकती है।

हालांकि, तकनीकी रूप से कार्बन टैक्स का भुगतान सीधे भारतीय निर्यातकों को नहीं करना होगा। यूरोपीय संघ में स्थित आयातकों को—जो अधिकृत सीबीएएम घोषणाकर्ता के रूप में पंजीकृत हैं—आयातित वस्तुओं में निहित कार्बन उत्सर्जन के अनुरूप सीबीएएम प्रमाणपत्र खरीदने होंगे। लेकिन इसका आर्थिक भार अंततः भारतीय निर्यातकों पर ही पड़ेगा।

विशेषज्ञों के अनुसार, यूरोपीय संघ उन उत्पादों पर कार्बन टैक्स लगा रहा है, जिनके निर्माण के दौरान अधिक कार्बन उत्सर्जन होता है। इस्पात क्षेत्र में ब्लास्ट फर्नेस-बेसिक ऑक्सीजन फर्नेस मार्ग में उत्सर्जन सबसे अधिक होता है, जबकि गैस आधारित डायरेक्ट रिड्यूस्ड आयरन (DRI) और कबाड़ आधारित इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस में यह अपेक्षाकृत कम होता है। वहीं, एल्युमिनियम उत्पादन में बिजली का स्रोत और ऊर्जा की खपत अहम भूमिका निभाती है। कोयले से उत्पादित बिजली से कार्बन बोझ बढ़ता है, जिससे सीबीएएम लागत भी बढ़ जाती है।

कांग्रेस का कहना है कि यदि भारत-ईयू एफटीए में इस मुद्दे पर ठोस समाधान नहीं निकाला गया, तो ईयू का कार्बन टैक्स भारतीय निर्यात और उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है।

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