Tuesday, March 31, 2026
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पैतृक जमीन की धोखाधड़ी का मामला, 48 वर्षों तक छिपाई बात इस तरह आई सामने

पैतृक जमीन की धोखाधड़ी के मामले में पिता-पुत्रों के खिलाफ पुलिस ने कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की है। इस मामले में 18 अगस्त 2021 को डोईवाला थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। दून निवासी जशबहादुर चौहान ने अपने चाचा अवध बहादुर सिंह और उनके बेटों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप है कि अवध ने हर्रावाला में अवैध रूप से करीब ढाई एकड़ कृषि भूमि को धोखाधड़ी से अपने नाम कर लिया था। भूमि जशबहादुर के पिता तेज बहादुर सिंह की थी, जो वर्ष 1973 में यूपी पुलिस में कांस्टेबल थे। उनकी मृत्यु के बाद अवध बहादुर ने तेज बहादुर के रूप में एक व्यक्ति को खड़ा किया।
करीब 48 वर्षों तक यह बात राज ही रही। अगस्त 2018 में जब जशबहादुर के बेटे को यह बात पता चली तो उन्होंने पुलिस से शिकायत की। मुकदमा दर्ज करने के बाद जब पुलिस ने जांच की तो पता चला कि तेज बहादुर वर्ष 1973 में कभी देहरादून आए ही नहीं। न ही वह अवकाश पर थे।इस मामले में जशबहादुर की शिकायत पर 26 अप्रैल 2022 को एक मुकदमा और दर्ज किया गया। आरोप था कि आरोपी अवध बहादुर सिंह और उसके चारों बेटे दिनेश कुमार सिंह, गणेश बहादुर, संजय चौहान और अजय कुमार सिंह यह जमीन दोबारा बेचने की योजना बना रहे हैं। पुलिस ने मजिस्ट्रेट कोर्ट में आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467 (मूल्यवान दस्तावेजों की जालसाजी), 468 (धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी) और 471 (जाली कागजात को असली के रूप में प्रस्तुत करना) के आरोप में चार्जशीट दाखिल की है।

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