Monday, April 20, 2026
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आर्मी बैंड और ढोल-दमाऊं की धुनों के बीच मुखबा से गंगोत्री धाम रवाना हुई मां गंगा की डोली, कल खुलेंगे कपाट

गंगोत्री धाम: चारधाम यात्रा के शुभारंभ से पहले मां गंगा की भोगमूर्ति की विग्रह डोली शनिवार को परंपरागत विधि-विधान के साथ मुखबा गांव से गंगोत्री धाम के लिए रवाना हो गई। अभिजीत मुहूर्त में दोपहर 12 बजकर 15 मिनट पर आर्मी बैंड और ढोल-दमाऊं की अगुवाई में डोली यात्रा शुरू हुई, जिससे पूरा क्षेत्र भक्तिमय माहौल में डूब गया।

मां गंगा की विदाई के इस अवसर पर मुखबा गांव और हर्षिल घाटी के ग्रामीण बड़ी संख्या में एकत्र हुए। यह पल ग्रामीणों के लिए बेहद भावुक होता है। परंपरा के अनुसार, ग्रामीणों ने मां गंगा को फाफरे का भोग अर्पित किया और ‘कल्यो’ (कंडा) के रूप में छह माह के प्रवास हेतु सामग्री भेंट कर नम आंखों से विदाई दी।

इस विशेष मौके पर गांव से बाहर रह रहे लोग भी अपने पैतृक गांव पहुंचे, जबकि श्रद्धालुओं का मुखबा पहुंचने का सिलसिला लगातार जारी रहा। डोली यात्रा में तीर्थ पुरोहितों और सैकड़ों श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया।

डोली मुखबा से जांगला तक करीब सात किलोमीटर के दुर्गम मार्ग से होते हुए भैरो घाटी पहुंचेगी, जहां भैरो मंदिर में रात्रि विश्राम किया जाएगा। इसके बाद रविवार सुबह डोली गंगोत्री धाम के लिए प्रस्थान करेगी।

गंगोत्री धाम पहुंचने पर विशेष पूजा-अर्चना के बाद अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर दोपहर 12 बजकर 15 मिनट पर मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। कपाट खुलने के साथ ही छह माह तक चलने वाली चारधाम यात्रा विधिवत शुरू हो जाएगी।

परंपरा और आस्था का संगम
मंदिर समिति के अध्यक्ष धर्मानंद सेमवाल ने बताया कि सदियों पुरानी परंपरा के तहत ग्रामीण मां गंगा को फाफरे का भोग लगाते हैं और ‘कल्यो’ अर्पित करते हैं। यह परंपरा क्षेत्र की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है, जिसे आज भी पूरी श्रद्धा और भावनाओं के साथ निभाया जा रहा है।

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