Wednesday, January 7, 2026
Homeउत्तराखंडहरिद्वार कुंभ 2027: गंगा घाटों व धार्मिक स्थलों पर गैर हिंदुओं के...

हरिद्वार कुंभ 2027: गंगा घाटों व धार्मिक स्थलों पर गैर हिंदुओं के प्रवेश पर रोक की मांग, गंगा सभा ने सरकार से की अपील

हरिद्वार।
आगामी वर्ष 2027 में आयोजित होने वाले हरिद्वार कुंभ मेले को लेकर श्री गंगा सभा ने बड़ा मुद्दा उठाया है। गंगा सभा ने गंगा घाटों और प्रमुख धार्मिक स्थलों पर गैर हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने की मांग की है। संगठन का कहना है कि कुंभ मेला क्षेत्र को गैर हिंदुओं के लिए प्रतिबंधित घोषित कर इसे हिंदू क्षेत्र के रूप में मान्यता दी जानी चाहिए। उनका तर्क है कि यह कदम भव्य और दिव्य कुंभ के साथ-साथ सुरक्षित कुंभ आयोजन के लिए भी अत्यंत आवश्यक है।

प्रेस क्लब हरिद्वार में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान श्री गंगा सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम ने कहा कि सरकार को कुंभ मेला क्षेत्र को विधिवत हिंदू स्थान घोषित करना चाहिए। उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए बताया कि अंग्रेजों के शासनकाल में भी हरिद्वार नगर पालिका क्षेत्र में गैर हिंदुओं के ठहरने और व्यवसाय करने पर रोक थी। ऐसे में समय की मांग है कि आने वाले कुंभ मेले से पहले गंगा घाटों और धार्मिक स्थलों की पवित्रता बनाए रखने के लिए गैर हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया जाए।

नितिन गौतम ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2027 में हरिद्वार में दिव्य और भव्य कुंभ के आयोजन की घोषणा स्वागतयोग्य है। वर्ष 2021 के कुंभ मेले में कोरोना महामारी के कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगा स्नान से वंचित रह गए थे, जिन्हें अब 2027 में स्नान का अवसर मिलेगा। इससे सनातन धर्म को मजबूती मिलेगी और साथ ही स्थानीय व्यापार एवं पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि हरिद्वार नगर पालिका के बायलॉज के तहत नगर पालिका क्षेत्र को गैर हिंदू, मद्य और मांस निषेध क्षेत्र घोषित किया गया है। सरकार को चाहिए कि इन नियमों का सख्ती से पालन कराए, ताकि तीर्थ नगरी की गरिमा और मर्यादा बनी रह सके।

संत समाज की मिली-जुली राय

गंगा सभा की इस मांग पर संत समाज में मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ संत इस प्रस्ताव के समर्थन में नजर आए, जबकि कुछ ने इसे कुंभ जैसे विशाल आयोजन के लिहाज से अव्यावहारिक बताया।

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रवींद्र पुरी महाराज ने कहा कि पूरे मेला क्षेत्र को गैर हिंदुओं के लिए वर्जित करना व्यावहारिक नहीं है। वहीं, कुछ अन्य संतों का कहना है कि जब वेटिकन सिटी में गैर ईसाइयों के लिए कड़े नियम हैं, तो हरिद्वार जो देश की आध्यात्मिक राजधानी माना जाता है, वहां भी ऐसे प्रावधान किए जा सकते हैं।

महामंडलेश्वर ज्योतिर्मयानंद ने कहा कि सनातन धर्म वसुधैव कुटुंबकम की भावना रखता है, लेकिन जब धर्म और आस्था को साजिश के तहत अपवित्र करने के प्रयास होते हैं, तो इस तरह की मांगें स्वाभाविक और उचित प्रतीत होती हैं।

गौरतलब है कि गंगा सभा की इस मांग के बाद कुंभ 2027 को लेकर धार्मिक, सामाजिक और प्रशासनिक स्तर पर बहस तेज हो गई है। अब सभी की नजरें राज्य सरकार के फैसले पर टिकी हुई हैं।

RELATED ARTICLES

Most Popular

Recent Comments