Tuesday, October 27, 2026
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हरिद्वार भूमि घोटाला: विजिलेंस जांच पूरी, तत्कालीन SDM समेत तीन अफसरों पर कार्रवाई की सिफारिश

हरिद्वार। हरिद्वार के बहुचर्चित भूमि घोटाले में विजिलेंस ने अपनी जांच पूरी कर ली है। जांच में तहसील हरिद्वार के तत्कालीन एसडीएम समेत तीन अधिकारियों-कर्मचारियों की प्रथम दृष्टया संलिप्तता सामने आई है। विजिलेंस ने अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपते हुए संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की सिफारिश कर दी है। फिलहाल शासन स्तर पर जांच रिपोर्ट का अध्ययन किया जा रहा है।

विजिलेंस जांच में खुलासा हुआ है कि तहसील हरिद्वार में भूमि से जुड़े परवाने (भूमि हस्तांतरण या बंदोबस्त की पुष्टि करने वाले प्रमाणपत्र) जारी करने और धारा-143 जमींदारी विनाश अधिनियम (भू-उपयोग परिवर्तन) की प्रक्रिया में नियमों का पालन नहीं किया गया। जांच एजेंसी के अनुसार, धारा-143 सामान्य रूप से एक नियमित प्रक्रिया है, लेकिन तत्कालीन अधिकारियों और कर्मचारियों ने असामान्य तेजी दिखाते हुए नियमों की अनदेखी की और अपने कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही बरती।

54 करोड़ की भूमि खरीद से मचा था हड़कंप

यह मामला उस समय सामने आया था जब नगर निगम हरिद्वार ने वर्ष 2024 में ग्राम सराय क्षेत्र में कूड़े के ढेर के समीप स्थित अनुपयुक्त 2.3070 हेक्टेयर भूमि को लगभग 54 करोड़ रुपये में खरीद लिया। भूमि की उपयोगिता और मूल्य को लेकर सवाल उठे तो मामला शासन तक पहुंचा।

घोटाले के उजागर होने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सख्त कदम उठाते हुए दो आईएएस, एक पीसीएस समेत कुल 12 आरोपियों को निलंबित कर दिया था। इसके साथ ही पूरे प्रकरण की विजिलेंस जांच के आदेश दिए गए थे। 3 जून 2025 को शासन ने औपचारिक रूप से जांच का पत्र निदेशक विजिलेंस को भेजा था।

शासन को सौंपी गई विजिलेंस रिपोर्ट

विजिलेंस ने खुली जांच के दौरान दस्तावेजों, फाइलों और प्रक्रियाओं की गहन समीक्षा की। जांच पूरी होने के बाद निदेशक विजिलेंस डॉ. वी. मुरुगेशन ने रिपोर्ट शासन को सौंप दी। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि तहसील स्तर पर नियमों की अनदेखी कर भूमि से जुड़े मामलों को निस्तारित किया गया, जिससे सरकारी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हुए हैं।

SDM के खिलाफ विभागीय जांच जारी

प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर तत्कालीन एसडीएम अजयवीर सिंह (निलंबित) के खिलाफ उत्तराखंड सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 2003 के तहत विभागीय कार्रवाई पहले से ही चल रही है। उन्हें आरोपपत्र जारी कर जवाब मांगा गया था। 16 सितंबर को उन्होंने अपना लिखित पक्ष रखते हुए सभी आरोपों को खारिज किया है।

मामले की विभागीय जांच शासन ने अपर सचिव डॉ. आनंद श्रीवास्तव को सौंपी है। अब विजिलेंस रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई को लेकर शासन स्तर पर निर्णय लिया जाना है।

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