Wednesday, April 1, 2026
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हरिद्वार: रानीपुर विधायक आदेश चौहान को बड़ी राहत, जिला अदालत ने सीबीआई कोर्ट का फैसला पलटा

हरिद्वार के रानीपुर से विधायक आदेश चौहान को लंबे समय से चल रहे एक मामले में बड़ी राहत मिली है। देहरादून स्थित जिला एवं सत्र न्यायालय की अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम की अदालत ने स्पेशल सीबीआई कोर्ट के फैसले को निरस्त करते हुए विधायक आदेश चौहान समेत अन्य आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया है। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि स्पेशल कोर्ट द्वारा दिया गया आदेश त्रुटिपूर्ण था।

अदालत के इस निर्णय से विधायक आदेश चौहान के साथ-साथ इस मामले में सह-अभियुक्त बनाई गई उनकी भांजी दीपिका और संबंधित पुलिस अधिकारियों को भी राहत मिली है।

2009 में दर्ज हुआ था प्रताड़ना का मामला

दरअसल, यह मामला वर्ष 2009 का है। जानकारी के अनुसार विधायक आदेश चौहान की भांजी दीपिका का विवाह रुड़की निवासी मनीष के साथ हुआ था। 11 जुलाई 2009 को दीपिका ने गंगनहर थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए अपने ससुराल पक्ष पर प्रताड़ना का आरोप लगाया था।

शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए ससुराल पक्ष के लोगों को पूछताछ के लिए बुलाया था। इसी दौरान तत्कालीन इंस्पेक्टर आरके चमोली पर आरोप लगा कि उन्होंने आरोपियों को थाने बुलाकर अवैध रूप से हिरासत में रखा और उनके साथ मारपीट की। इसके बाद 13 जुलाई 2009 को विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज करते हुए आरोपियों के खिलाफ चालान भी पेश कर दिया गया था।

दीपिका ने अपने ससुर धीर सिंह, सास, ननद और पति मनीष पर गंभीर आरोप लगाए थे। हालांकि बाद में ससुराल पक्ष के सभी आरोपियों को अदालत से जमानत मिल गई थी।

पीड़िता के ससुर ने लगाया षड्यंत्र का आरोप

घटना के 17 दिन बाद, 27 जुलाई 2009 को दीपिका के ससुर धीर सिंह ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हुए विधायक आदेश चौहान पर षड्यंत्र रचने का आरोप लगाया। उन्होंने आरोप लगाया कि विधायक ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए तत्कालीन एसएचओ आरके चमोली, एसआई दिनेश, एसआई राजेंद्र सिंह रौतेला और बहू दीपिका के साथ मिलकर उन्हें और उनके परिवार को अवैध रूप से हिरासत में रखवाया।

सीबीआई जांच के बाद दाखिल हुआ आरोप पत्र

इस मामले की शुरुआती जांच सिविल पुलिस ने की थी और अंतिम आख्या प्रस्तुत की थी। बाद में मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी गई। जांच के बाद सीबीआई ने तत्कालीन एसएचओ, दो एसआई, विधायक आदेश चौहान और दीपिका समेत अन्य के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया।

स्पेशल सीबीआई मजिस्ट्रेट की अदालत में इस मामले में कुल 51 गवाहों के बयान दर्ज किए गए थे। इसके बाद 26 मई 2025 को अदालत ने विधायक आदेश चौहान समेत अन्य आरोपियों को दोषी करार देते हुए अधिकतम छह माह के कारावास और एक हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई थी।

अपील पर जिला अदालत से मिली राहत

स्पेशल कोर्ट के इस फैसले को चुनौती देते हुए विधायक आदेश चौहान ने जिला एवं सत्र न्यायालय देहरादून में अपील दायर की थी। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं ने अदालत के समक्ष विस्तृत बहस और साक्ष्य प्रस्तुत किए।

अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम महेश कोशिबा ने मामले की सुनवाई के बाद पाया कि स्पेशल कोर्ट के आदेश में कई त्रुटियां हैं। इसके बाद अदालत ने उस आदेश को निरस्त करते हुए विधायक आदेश चौहान सहित सभी आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया।

अदालत के इस फैसले के बाद करीब 16 साल पुराने इस मामले में सभी आरोपियों को बड़ी राहत मिली है।

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