Thursday, April 9, 2026
Homeउत्तराखंडHigh Court: बेरोजगारी का बहाना बनाकर पिता नहीं बच सकता बच्चों के...

High Court: बेरोजगारी का बहाना बनाकर पिता नहीं बच सकता बच्चों के भरण-पोषण से, 6500 रुपये प्रति बच्चा देने का आदेश बरकरार

देहरादून। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि केवल बेरोजगारी का बहाना बनाकर कोई सक्षम और योग्य पिता अपने नाबालिग बच्चों के भरण-पोषण की जिम्मेदारी से नहीं बच सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति योग्य है और उसके पास आय अर्जित करने की क्षमता है, तो वह जानबूझकर बेरोजगार रहकर कानूनी दायित्वों से बचने का दावा नहीं कर सकता।

हाईकोर्ट ने हरिद्वार के परिवार न्यायालय (फैमिली कोर्ट) के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें पिता को अपने दो नाबालिग बच्चों के लिए प्रति बच्चा 6500 रुपये प्रतिमाह भरण-पोषण देने का निर्देश दिया गया था। अदालत ने इस राशि को उचित मानते हुए इसमें न तो कमी करने की आवश्यकता बताई और न ही बढ़ोतरी की जरूरत समझी।

बेरोजगारी का हवाला देकर दी थी चुनौती

दरअसल, हरिद्वार के परिवार न्यायालय ने पहले आदेश देते हुए पिता को अपने दोनों बच्चों के भरण-पोषण के लिए 6500-6500 रुपये प्रतिमाह देने को कहा था। इस आदेश को चुनौती देते हुए पिता ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याचिका में उन्होंने अपनी आर्थिक स्थिति कमजोर होने और बेरोजगार होने का हवाला देते हुए भरण-पोषण की राशि कम करने की मांग की।

वहीं, बच्चों की ओर से अदालत में भरण-पोषण की राशि बढ़ाने की मांग रखी गई थी।

अदालत ने दावे को माना गैर-ईमानदार

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता पिता एक योग्य एमसीए (MCA) स्नातक हैं और उनके पास कार्य अनुभव भी है। सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि उन्हें पहले एक विदेशी कंपनी में नौकरी का प्रस्ताव मिला था, जिसमें लगभग 64 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन मिलने की बात उन्होंने स्वयं स्वीकार की थी।

इन तथ्यों को देखते हुए हाईकोर्ट ने पिता द्वारा बेरोजगारी का दिया गया तर्क असत्य और गैर-ईमानदार माना। अदालत ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि याचिकाकर्ता जानबूझकर बेरोजगार रहने का दावा कर रहे हैं, ताकि बच्चों के भरण-पोषण की जिम्मेदारी से बच सकें।

मां के कमाने से कम नहीं होती पिता की जिम्मेदारी

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि यदि मां आय अर्जित कर रही है, तो इससे पिता की जिम्मेदारी कम नहीं हो जाती। बच्चों का पालन-पोषण करना पिता का स्वतंत्र और कानूनी दायित्व है।

अदालत ने कहा कि जब बच्चे मां के साथ रह रहे हैं और उनके दैनिक खर्चों का अधिकांश भार मां ही उठा रही है, तो ऐसे में पिता को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।

भरण-पोषण की राशि को बताया उचित

सभी पक्षों को सुनने और तथ्यों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने परिवार न्यायालय के आदेश को सही ठहराया। अदालत ने कहा कि 6500 रुपये प्रति बच्चा प्रतिमाह भरण-पोषण की राशि उचित और न्यायसंगत है, इसलिए इसमें किसी प्रकार के बदलाव की आवश्यकता नहीं है।

इस फैसले को बच्चों के अधिकारों की रक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

RELATED ARTICLES

Most Popular

Recent Comments