Thursday, April 2, 2026
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500 रुपये होते तो मिल जाती सलाखों से मुक्ति, नहीं देखे पाएंगे 25 बंदी आजादी की 75वीं सालगिरह का सूरज

नैनीताल जेल और हल्द्वानी उप कारागार में कई बंदी पांच सौ रुपये से लेकर एक हजार रुपये नहीं होने से आजादी की 75वीं सालगिरह का सूरज नहीं देख पाएंगे। दरअसल उनकी सजा तो पूरी हो गई है, लेकिन कोर्ट से मिले आर्थिक दंड की धनराशि नहीं भरने की वजह से अतिरिक्त कारावास काटने के लिए मजबूर हैं। कुछ यही कहानी देहरादून और टिहरी गढ़वाल समेत तमाम जेलों में सजा काट रहे कई कैदियों की है। आजादी की खुशी उनके लिए सबसे ज्यादा अहम है जो सलाखों के पीछे सजा काट रहे हैं। अपराध किया है तो सजा मिलना भी लाजमी है, लेकिन सजा पूरी होने के बाद जुर्माने की रकम नहीं चुकाने की वजह से जो अतिरिक्त सजा काटनी पड़ती है वह सजा ज्यादा तकलीफ देती है। वर्तमान में हल्द्वानी उप कारागार में पंद्रह और नैनीताल जेल में पांच कैदी ऐसे हैं जो आर्थिक परेशानी के चलते आजादी का जश्न नहीं मना पाएंगे।
देहरादून और टिहरी जेल में भी यही हाल
प्रदेश की राजधानी देहरादून और टिहरी गढ़वाल जेल के भी कमोवेश हल्द्वानी जेल जैसे ही हालात हैं। आंकड़ों के मुताबिक देहरादून जेल में 18 कैदी और टिहरी जेल में पांच कैदी जुर्माने की सजा भुगत रहे हैं। परिजनों के प्रयास भी उनकी आर्थिक तंगी के सामने हारते नजर आ रहे हैं।

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