Saturday, October 24, 2026
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उत्तराखंड: 1962 के चीन युद्ध के बाद खाली हुआ जादूंग गांव फिर से होगा आबाद, 23 परिवारों को मिलेंगे पहाड़ी शैली के घर

उत्तराखंड के सीमावर्ती उत्तरकाशी जिले में स्थित ऐतिहासिक जादूंग गांव, जो 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद खाली करा लिया गया था, अब एक बार फिर से आबाद होने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। केंद्र सरकार की वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत इस गांव को पुनर्जीवित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। योजना के अंतर्गत गांव में बुनियादी ढांचे का विकास करने के साथ-साथ पर्यटन सुविधाओं को भी मजबूत किया जाएगा।

नेलांग घाटी के समीप स्थित जादूंग गांव रणनीतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। युद्ध के बाद सुरक्षा कारणों से यहां के लोगों को अन्य स्थानों पर बसाया गया था। दशकों बाद अब सरकार ने गांव को दोबारा बसाने का निर्णय लिया है, जिससे मूल निवासियों की वापसी का रास्ता साफ हो सके।

प्रदेश सरकार की ओर से जादूंग गांव के 23 मूल परिवारों को पारंपरिक पहाड़ी वास्तुकला में आवास उपलब्ध कराए जाएंगे। पहले चरण में गढ़वाल मंडल विकास निगम (जीएमवीएन) ने छह घरों के निर्माण कार्य की शुरुआत कर दी है। आगे चरणबद्ध तरीके से शेष परिवारों के लिए भी आवास तैयार किए जाएंगे।

पर्यटन विभाग जादूंग गांव को एक नए पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है। इसके तहत सड़क, बिजली, पेयजल, संचार और अन्य आवश्यक सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा, ताकि पर्यटकों के साथ-साथ स्थानीय लोगों को भी बेहतर सुविधाएं मिल सकें। गांव में पर्यटन गतिविधियों के बढ़ने से स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।

पर्यटन सचिव धीराज गर्ब्याल ने बताया कि जादूंग गांव के मूल निवासियों को वापस बसाने से न केवल गांव फिर से जीवंत होगा, बल्कि स्थानीय संस्कृति, परंपराओं और सीमावर्ती अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि जीएमवीएन के माध्यम से सभी 23 परिवारों को घर उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि वे स्थायी रूप से अपने गांव में आकर बस सकें।

सरकार का मानना है कि जादूंग गांव के पुनर्विकास से सीमावर्ती क्षेत्रों में जनजीवन को नई ऊर्जा मिलेगी और साथ ही पर्यटन के माध्यम से राज्य की अर्थव्यवस्था को भी लाभ पहुंचेगा।

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