Monday, November 2, 2026
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जनजाति भूमि विवाद में बड़ा एक्शन: रजिस्ट्रार कानूनगो हटे, विधायक पुत्र अतुल पांडेय को नोटिस

जनजाति समुदाय की भूमि से जुड़े विवाद में प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। तहसील स्तर पर कार्यरत रजिस्ट्रार कानूनगो राकेश शाह को तत्काल प्रभाव से उत्तरकाशी संबद्ध कर दिया गया है। वहीं, भाजपा विधायक अरविंद पांडेय के पुत्र अतुल पांडेय पर कथित फर्जीवाड़े के आरोपों को लेकर नोटिस जारी कर एक सप्ताह के भीतर जवाब तलब किया गया है।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई मंडलायुक्त के आदेश के बाद की गई है। बताया जा रहा है कि उक्त आदेश को पहले राजस्व अभिलेखों में दर्ज किया गया, लेकिन बाद में उसे हटा दिए जाने की भी बात सामने आई है। हालांकि, इस पूरे मामले में फिलहाल कोई भी अधिकारी खुलकर बयान देने से बच रहा है।

मामले में आरोप है कि कूटरचित साक्ष्यों के आधार पर जनजाति समुदाय की भूमि को अतुल पांडेय के नाम दर्ज कराया गया। इस संबंध में तहसीलदार बाजपुर प्रताप सिंह चौहान की ओर से नोटिस जारी कर अतुल पांडेय को अधोहस्ताक्षरी के कार्यालय में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए गए हैं। स्पष्ट किया गया है कि निर्धारित समय में जवाब प्रस्तुत न करने पर उपलब्ध अभिलेखों और शिकायत के आधार पर आगे की जांच कार्रवाई की जाएगी।

नोटिस में उल्लेख किया गया है कि ग्राम सैमलपुरी निवासी नन्नी देवी, संजू कुमार और मंगल सिंह द्वारा दी गई शिकायत में खतौनी संख्या 20 के खसरा नंबर 25/1 की भूमि उनके नाम दर्ज बताई गई है। आरोप है कि इस भूमि को फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से अतुल पांडेय के नाम दर्ज करा लिया गया।

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि न्यायालय से उनके पक्ष में निर्णय आने के बावजूद वे अपनी भूमि पर कब्जा नहीं पा सके हैं। वहीं, अतुल पांडेय की ओर से भूमि पर 50 वर्षों से अधिक समय से कब्जे का दावा किया गया है, जो तथ्यों से मेल नहीं खाता। दस्तावेजों के अनुसार वर्ष 2010 में प्रस्तुत एक प्रार्थना पत्र के समय अतुल पांडेय की उम्र मात्र 16 वर्ष थी, जबकि वर्तमान में उनकी आयु 32 वर्ष बताई जा रही है।

यह भी आरोप है कि संबंधित भूमि जनजाति बुक्सा समुदाय के लोगों की है, जिसे अवैध रूप से अपने नाम कराकर बाद में विक्रय कर लगभग 28 लाख रुपये का लाभ अर्जित किया गया। साथ ही, न्यायालय को गुमराह करने के लिए झूठे शपथ पत्र और साक्ष्य प्रस्तुत करने की बात भी सामने आई है।

प्रथम दृष्टया यह मामला जनजाति समुदाय की भूमि के अवैध हस्तांतरण और धोखाधड़ी से जुड़ा प्रतीत हो रहा है, जिसने क्षेत्र में व्यापक चर्चा और चिंता का माहौल पैदा कर दिया है। प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर अब सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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