Monday, May 4, 2026
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लिपुलेख दर्रे से भारत-चीन व्यापार फिर शुरू होने की तैयारी, सीमावर्ती क्षेत्रों को मिलेगा बड़ा आर्थिक लाभ

पिथौरागढ़। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले स्थित लिपुलेख दर्रे से भारत और चीन के बीच व्यापार एक बार फिर शुरू होने जा रहा है, जिससे दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। जून माह से इस व्यापार के दोबारा शुरू होने की संभावना है, जिससे सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ मिलेगा।

लंबे समय से भारत-चीन के बीच इस पारंपरिक मार्ग से सीमित स्तर पर व्यापार होता रहा है, लेकिन कोविड-19 महामारी और दोनों देशों के बीच बढ़े तनाव के चलते पिछले लगभग छह वर्षों से यह गतिविधि बंद थी। अब हालात सामान्य होने के साथ इसे पुनः शुरू करने की दिशा में प्रयास तेज हो गए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान भू-राजनीतिक परिस्थितियों में दोनों देश आपसी संबंधों को सुधारने और मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। ऐसे में लिपुलेख दर्रे से होने वाला व्यापार महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। भले ही इस व्यापार का मौद्रिक मूल्य अभी दो से पांच करोड़ रुपये के बीच सीमित रहा है, लेकिन इसकी रणनीतिक अहमियत कहीं अधिक है।

जानकारों के अनुसार यदि इस व्यापार की पूरी क्षमता का उपयोग किया जाए तो इसका दायरा बढ़कर 100 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। यह व्यापार मुख्य रूप से सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले स्थानीय लोगों के बीच होता है, जिससे उनकी आजीविका पर सीधा असर पड़ता है।

सीमावर्ती लोगों को मिलेगा सीधा लाभ
लिपुलेख दर्रे के जरिए उत्तराखंड के स्थानीय व्यापारी और किसान कपड़े, खाद्य तेल, घी, मसाले और अनाज जैसी वस्तुओं का निर्यात करते हैं। वहीं, तिब्बत क्षेत्र से ऊन, कच्चा रेशम, छिर्बी (पारंपरिक पशु उत्पाद) और सुहागा जैसी वस्तुओं का आयात किया जाता है।

इस व्यापार के पुनः शुरू होने से न केवल सीमावर्ती क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी, बल्कि दोनों देशों के लोगों के बीच आपसी संपर्क और विश्वास भी मजबूत होगा। स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ने की भी उम्मीद जताई जा रही है।

रणनीतिक रूप से भी अहम है व्यापार
रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि लिपुलेख दर्रा केवल व्यापारिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि रणनीतिक रूप से भी बेहद महत्वपूर्ण है। इस मार्ग के जरिए दोनों देशों के बीच संपर्क बना रहता है, जो भविष्य में कूटनीतिक संबंधों को भी सकारात्मक दिशा दे सकता है।

कुल मिलाकर, लिपुलेख दर्रे से व्यापार की बहाली को भारत-चीन संबंधों में सुधार और सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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